पठ्-धातुरूपाणि (पञ्चसु लकारेषु)-Path_Dhaturoop


 

पठ् धातु रूप - संस्कृत ज्ञान | Path Dhatu Roop in Sanskrit
sanskritgyan.in - संस्कृत व्याकरण

पठ् धातु रूप (Path Dhatu Roop in Sanskrit)

संस्कृत भाषा में 'पठ्' (पढ़ना) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।

📚 पठ् धातु परिचय (Introduction)

संस्कृत साहित्य और व्याकरण में 'पठ्' धातु का प्रयोग 'पढ़ना' (To Read / To Study) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी धातु है तथा भ्वादिगण के अंतर्गत आती है। संस्कृत व्याकरण को सरलता से समझने के लिए धातु रूपों का ज्ञान होना अति आवश्यक है।

धातु का नाम पठ् (Path)
अर्थ पढ़ना (To Read)
पद एवं गण परस्मैपद / भ्वादिगण

1. लट् लकार - पठ् धातु (वर्तमान काल)

Present Tense

वर्तमान समय में हो रही क्रियाओं का बोध कराने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथम पुरुषः पठति पठतः पठन्ति
मध्यम पुरुषः पठसि पठथः पठथ
उत्तम पुरुषः पठामि पठावः पठामः
💡 वाक्य प्रयोग (Examples):
  • सः पुस्तकं पठति। — वह पुस्तक पढ़ता है। (He reads a book)
  • त्वम् किं पठसि? — तुम क्या पढ़ते हो? (What do you read?)
  • अहम् संस्कृतम् पठामि। — मैं संस्कृत पढ़ता हूँ। (I read Sanskrit)

2. लृट् लकार - पठ् धातु (भविष्यत् काल)

Future Tense

भविष्य में होने वाली क्रियाओं को दर्शाने के लिए लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है:

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथम पुरुषः पठिष्यति पठिष्यतः पठिष्यन्ति
मध्यम पुरुषः पठिष्यसि पठिष्यथः पठिष्यथ
उत्तम पुरुषः पठिष्यामि पठिष्यावः पठिष्यामः
💡 वाक्य प्रयोग (Examples):
  • रामः श्वः ग्रन्थम् पठिष्यति। — राम कल ग्रंथ पढ़ेगा।
  • यूयम् पाठम् पठिष्यथ। — तुम सब पाठ पढ़ोगे।
  • वयम् वेदम् पठिष्यामः। — हम सब वेद पढ़ेंगे।

3. लङ् लकार - पठ् धातु (अनद्यतन भूतकाल)

Past Tense

बीते हुए समय (भूतकाल) की क्रिया को बताने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथम पुरुषः अपठत् अपठताम् अपठन्
मध्यम पुरुषः अपठः अपठतम् अपठत
उत्तम पुरुषः अपठम् अपठाव अपठाम
💡 वाक्य प्रयोग (Examples):
  • छात्रः पाठम् अपठत्। — छात्र ने पाठ पढ़ा।
  • तौ पुस्तकम् अपठताम्। — उन दोनों ने पुस्तक पढ़ी।
  • अहम् पत्रम् अपठम्। — मैंने पत्र पढ़ा।

4. लोट् लकार - पठ् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)

Imperative Mood

आज्ञा देने, उपदेश, प्रार्थना या अनुमति लेने के अर्थ में लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथम पुरुषः पठतु पठताम् पठन्तु
मध्यम पुरुषः पठ पठतम् पठत
उत्तम पुरुषः पठानि पठाव पठाम
💡 वाक्य प्रयोग (Examples):
  • सः पठतु। — वह पढ़े। (Let him read)
  • त्वम् उच्चैः पठ। — तुम जोर से पढ़ो। (You read aloud)
  • किम् अहम् पठानि? — क्या मैं पढ़ूँ? (May I read?)

5. विधिलिङ् लकार - पठ् धातु (चाहिए अर्थ में)

Potential Mood

चाहिए अर्थ, सम्भावना, कर्त्तव्य या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथम पुरुषः पठेत् पठेताम् पठेयुः
मध्यम पुरुषः पठेः पठेतम् पठेत
उत्तम पुरुषः पठेयम् पठेव पठेम
💡 वाक्य प्रयोग (Examples):
  • बालकः प्रतिदिनम् पठेत्। — बालक को प्रतिदिन पढ़ना चाहिए।
  • त्वम् ध्यानपूर्वकम् पठेः। — तुम्हें ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
  • सत्यम् पठेम। — हमें सत्य पढ़ना चाहिए।

📌 पठ् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)

  • लट् लकार (वर्तमान): इसके अंत में प्रत्यय -ति, -तः, -न्ति, -सि, -थः, -थ, -मि, -वः, -मः जुड़ते हैं।
  • लृट् लकार (भविष्यत्): लट् लकार की तरह ही चलता है, बस धातु के साथ 'इष्य' (पठिष्यति) जुड़ जाता है।
  • लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में हमेशा उपसर्ग की तरह 'अ' (अपठत्) लगाया जाता है।
  • विसर्ग ध्यान दें: लट् एवं लृट् लकार में प्रथम पुरुष द्विवचन, मध्यम पुरुष द्विवचन, उत्तम पुरुष द्विवचन और बहुवचन में विसर्ग (ः) आता है (L-Shape Rule)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: पठ् धातु का अर्थ क्या होता है?

उत्तर: 'पठ्' धातु का अर्थ संस्कृत में 'पढ़ना' (To Read / To Study) होता है।

प्रश्न 2: पठ् धातु किस गण और पद के अंतर्गत आती है?

उत्तर: पठ् धातु भ्वादिगण की परस्मैपदी धातु है।

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