संस्कृत व्याकरण में प्रत्यय (Suffixes) का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो धातुओं (क्रियाओं) या शब्दों के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन या विशेष रूप उत्पन्न करते हैं। इस पोस्ट में हम पाँच मुख्य प्रत्ययों—क्त्वा, तुमुन्, ल्यप्, शतृ, और शानच्—के विषय में विस्तार से जानेंगे।
1. क्त्वा प्रत्यय (Ktva Pratyaya)
परिचय: जब कर्ता एक क्रिया को समाप्त करके दूसरी क्रिया करता है, तो पहली (पूर्वकालिक) क्रिया में 'क्त्वा' प्रत्यय का प्रयोग होता है। इसका प्रयोग 'करके' या 'कर' के अर्थ में होता है।
- 'क्त्वा' में से 'क्' का लोप हो जाता है और केवल 'त्वा' शेष बचता है।
- क्त्वा प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं, अर्थात् इनके रूप लिंग, वचन या विभक्ति के अनुसार नहीं बदलते।
- कुछ धातुओं में 'त्वा' से पहले 'इ' (इट्) का आगम होता है (जैसे: पठ् + क्त्वा = पठित्वा)।
प्रमुख 5 उदाहरण:
- पठ् + क्त्वा = पठित्वा (पढ़कर) — बालकः पाठं पठित्वा गृहं गच्छति।
- गम् + क्त्वा = गत्वा (जाकर) — सः विद्यालयं गत्वा पठति।
- खाद् + क्त्वा = खादित्वा (खाकर) — त्वं फलं खादित्वा जलं पिब।
- हस् + क्त्वा = हसित्वा (हँसकर) — छात्राः हसित्वा अवदन्।
- लिख् + क्त्वा = लिखित्वा (लिखकर) — अहम् पत्रं लिखित्वा प्रेषयामि।
2. ल्यप् प्रत्यय (Lyap Pratyaya)
परिचय: ल्यप् प्रत्यय का अर्थ भी 'क्त्वा' के समान ही 'करके' या 'कर' होता है। अंतर केवल इतना है कि जब धातु से पूर्व कोई उपसर्ग (Prefix) लगा हो, तो 'क्त्वा' के स्थान पर 'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- 'ल्यप्' प्रत्यय में से 'ल्' और 'प्' का लोप हो जाता है, केवल 'य' शेष रहता है।
- यह केवल उपसर्ग-युक्त धातुओं के साथ ही प्रयुक्त होता है।
- ल्यप् प्रत्ययान्त शब्द भी अव्यय होते हैं।
प्रमुख 5 उदाहरण:
- आ + गम् + ल्यप् = आगत्य (आकर) — सह गृहात् आगत्य पठति।
- प्र + नम्र + ल्यप् = प्रणम्य (प्रणाम करके) — छात्रः गुरुं प्रणम्य उपविशति।
- वि + हस् + ल्यप् = विहस्य (हँसकर) — राजा विहस्य अवदत्।
- उप + कृ + ल्यप् = उपकृत्य (उपकार करके) — सज्जनाः उपकृत्य न स्मरन्ति।
- वि + जि + ल्यप् = विजित्य ( जीतकर) — नृपः शत्रुं विजित्य नगरं प्राविशत्।
3. तुमुन् प्रत्यय (Tumun Pratyaya)
परिचय: 'के लिए' (निमित्त/प्रयोजन) के अर्थ में धातु के साथ 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। जब एक क्रिया दूसरी क्रिया के प्रयोजन/उद्देश्य के रूप में होती है, तब तुमुन् प्रत्यय लगता है।
- तुमुन् में से 'उम्' और 'न्' का लोप हो जाता है तथा केवल 'तुम्' शेष बचता है।
- इसके रूप भी परिवर्तित नहीं होते, यह अव्यय बन जाता है।
- सेट् धातुओं में 'तुम्' से पहले 'इ' जुड़ता है (जैसे: पठ् + तुमुन् = पठितुम्)।
प्रमुख 5 उदाहरण:
- पठ् + तुमुन् = पठितुम् (पढ़ने के लिए) — सः पठितुम् विद्यालयं गच्छति।
- पा + तुमुन् = पातुम् (पीने के लिए) — बालकः जलं पातुम् इच्छति।
- गम् + तुमुन् = गन्तुम् (जाने के लिए) — अहम् गन्तुम् उद्यतः अस्मि।
- दा + तुमुन् = दातुम् (देने के लिए) — धनिकः दानं दातुम् आगच्छति।
- क्रीड् + तुमुन् = क्रीडितुम् (खेलने के लिए) — बालकाः क्रीडितुम् क्रीडाङ्गणं गच्छन्ति।
4. शतृ प्रत्यय (Shatri Pratyaya)
परिचय: वर्तमान काल में 'करता हुआ', 'जाता हुआ', 'पढ़ता हुआ' (Continuous action) अर्थ को प्रकट करने के लिए परस्मैपद धातुओं के साथ 'शतृ' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
- शतृ में से 'श्' और 'ऋ' का लोप होकर 'अत्' शेष रहता है (जो पुल्लिंग में 'अन्' जैसा दिखता है)।
- इसके रूप तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक लिंग) तथा सभी विभक्तियों में चलते हैं।
प्रमुख 5 उदाहरण (पुल्लिंग में):
- पठ् + शतृ = पठन् (पढ़ता हुआ) — पठन् बालकः नमति।
- गम् + शतृ = गच्छन् (जाता हुआ) — मार्गे गच्छन् जनः पश्यति।
- दृश् + शतृ = पश्यन् (देखता हुआ) — पश्यन् शिशुः हसति।
- धाव् + शतृ = धावन् (दौड़ता हुआ) — धावन् अश्वः पतति।
- हस् + शतृ = हसन् (हँसता हुआ) — सह हसन् अवदत्।
5. शानच् प्रत्यय (Shanach Pratyaya)
परिचय: शतृ प्रत्यय की भाँति शानच् प्रत्यय भी वर्तमान काल में 'करता हुआ' के अर्थ में प्रयुक्त होता है, किंतु इसका प्रयोग केवल आत्मनेपद धातुओं (तथा कर्मवाच्य/भाववाच्य) के साथ होता है।
- शानच् में से 'श्' और 'च्' का लोप होकर 'आन' या 'मान' शेष बचता है।
- इसके रूप भी संज्ञा/विशेषण शब्दों की भाँति तीनों लिंगों में चलते हैं (पुल्लिंग में 'राम' की तरह, स्त्रीलिंग में 'रमा' और नपुंसकलिंग में 'फल' की तरह)।
प्रमुख 5 उदाहरण (पुल्लिंग में):
- सेव् + शानच् = सेवमानः (सेवा करता हुआ) — गुरुं सेवमानः छात्रः विद्यां लभते।
- लभ् + शानच् = लभमानः (प्राप्त करता हुआ) — धनं लभमानः जनः प्रसन्नः भवति।
- वृध् + शानच् = वर्धमानः (बढ़ता हुआ) — वर्धमानः वृक्षः छायां यच्छति।
- रुच् + शानच् = रोचमानः (अच्छा लगता हुआ) — रोचमानः मोदकः बालकाय रोचते।
- कम्प् + शानच् = कम्पमानः (काँपता हुआ) — कम्पमानः जनः शीतं अनुभवति।
विस्तृत प्रत्ययान्त रूप तालिका (40-50 उदाहरण)
1. क्त्वा प्रत्यय की तालिका
| क्र.सं. | धातु (Meaning) | प्रत्यय | प्रत्ययान्त रूप | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् (पढ़ना) | क्त्वा | पठित्वा | पढ़कर |
| 2 | गम् (जाना) | क्त्वा | गत्वा | जाकर |
| 3 | खाद् (खाना) | क्त्वा | खादित्वा | खाकर |
| 4 | लिख् (लिखना) | क्त्वा | लिखित्वा | लिखकर |
| 5 | हस् (हँसना) | क्त्वा | हसित्वा | हँसकर |
| 6 | पा (पीना) | क्त्वा | पीत्वा | पीकर |
| 7 | दा (देना) | क्त्वा | दत्वा | देकर |
| 8 | कृ (करना) | क्त्वा | कृत्वा | करके |
| 9 | श्रु (सुनना) | क्त्वा | श्रुत्वा | सुनकर |
| 10 | दृश् (देखना) | क्त्वा | दृष्ट्वा | देखकर |
| 11 | स्था (ठहरना) | क्त्वा | स्थित्वा | ठहरकर |
| 12 | नी (ले जाना) | क्त्वा | नीत्वा | ले जाकर |
| 13 | स्पृश् (छूना) | क्त्वा | स्पृष्ट्वा | छूकर |
| 14 | त्यज् (छोड़ना) | क्त्वा | त्यक्त्वा | छोड़कर |
| 15 | स्मृ (याद करना) | क्त्वा | स्मृत्वा | याद करके |
| 16 | पूज् (पूजना) | क्त्वा | पूजयित्वा | पूजकर |
| 17 | धाव् (दौड़ना) | क्त्वा | धावित्वा | दौड़कर |
| 18 | ग्रह् (ग्रहण करना) | क्त्वा | गृहीत्वा | लेकर |
| 19 | भी (डरना) | क्त्वा | भीत्वा | डरकर |
| 20 | वच् (बोलना) | क्त्वा | उक्त्वा | बोलकर |
2. ल्यप् प्रत्यय की तालिका
| क्र.सं. | उपसर्ग + धातु | प्रत्यय | प्रत्ययान्त रूप | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| 1 | आ + गम् | ल्यप् | आगत्य | आकर |
| 2 | प्र + नम्र | ल्यप् | प्रणम्य | प्रणाम करके |
| 3 | वि + हस् | ल्यप् | विहस्य | हँसकर |
| 4 | उप + कृ | ल्यप् | उपकृत्य | उपकार करके |
| 5 | सम् + पठ् | ल्यप् | संपठ्य | भली-भांति पढ़कर |
| 6 | आ + नी | ल्यप् | आनीय | लाकर |
| 7 | वि + जि | ल्यप् | विजित्य | जीतकर |
| 8 | प्र + दा | ल्यप् | प्रदाय | प्रदान करके |
| 9 | अनु + कृ | ल्यप् | अनुकृत्य | नकल करके |
| 10 | परित्यज् (परि+त्यज्) | ल्यप् | परित्यज्य | त्यागकर |
| 11 | उत् + स्था | ल्यप् | उत्थाय | उठकर |
| 12 | वि + ज्ञा | ल्यप् | विज्ञाय | जानाकर/समझकर |
| 13 | आ + लोक् | ल्यप् | आलोक्य | देखकर |
| 14 | नि + वस् | ल्यप् | निवस्य | रहकर |
| 15 | सम् + पूज् | ल्यप् | संपूज्य | पूजा करके |
3. तुमुन् प्रत्यय की तालिका
| क्र.सं. | धातु (Meaning) | प्रत्यय | प्रत्ययान्त रूप | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् (पढ़ना) | तुमुन् | पठितुम् | पढ़ने के लिए |
| 2 | गम् (जाना) | तुमुन् | गन्तुम् | जाने के लिए |
| 3 | खाद् (खाना) | तुमुन् | खादितुम् | खाने के लिए |
| 4 | लिख् (लिखना) | तुमुन् | लेखितुम् | लिखने के लिए |
| 5 | हस् (हँसना) | तुमुन् | हसितुम् | हँसने के लिए |
| 6 | पा (पीना) | तुमुन् | पातुम् | पीने के लिए |
| 7 | दा (देना) | तुमुन् | दातुम् | देने के लिए |
| 8 | कृ (करना) | तुमुन् | कर्तुम् | करने के लिए |
| 9 | श्रु (सुनना) | तुमुन् | श्रोतुम् | सुनने के लिए |
| 10 | दृश् (देखना) | तुमुन् | द्रष्टुम् | देखने के लिए |
| 11 | स्था (ठहरना) | तुमुन् | स्थातुम् | ठहरने के लिए |
| 12 | नी (ले जाना) | तुमुन् | नेतुम् | ले जाने के लिए |
| 13 | क्रीड् (खेलना) | तुमुन् | क्रीडितुम् | खेलने के लिए |
| 14 | त्यज् (छोड़ना) | तुमुन् | त्यक्तुम् | छोड़ने के लिए |
| 15 | स्मृ (याद करना) | तुमुन् | स्मर्तुम् | याद करने के लिए |
4. शतृ प्रत्यय की तालिका (तीनों लिंगों में)
| क्र.सं. | धातु | पुल्लिंग (Masc.) | स्त्रीलिंग (Fem.) | नपुंसकलिंग (Neut.) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् | पठन् | पठन्ती | पठत् | पढ़ता हुआ |
| 2 | गम् (गच्छ) | गच्छन् | गच्छन्ती | गच्छत् | जाता हुआ |
| 3 | लिख् | लिखन् | लिखन्ती | लिखत् | लिखता हुआ |
| 4 | हस् | हसन् | हसन्ती | हसत् | हँसता हुआ |
| 5 | दृश् (पश्य) | पश्यन् | पश्यन्ती | पश्यत् | देखता हुआ |
| 6 | धाव् | धावन् | धावन्ती | धावत् | दौड़ता हुआ |
| 7 | पा (पिब्) | पिबन् | पिबन्ती | पिबत् | पीता हुआ |
| 8 | स्था (तिष्ठ्) | तिष्ठन् | तिष्ठन्ती | तिष्ठत् | बैठता/ठहरता हुआ |
| 9 | नृत् | नृत्यन् | नृत्यन्ती | नृत्यत् | नाचता हुआ |
| 10 | कृ | कुर्वन् | कुर्वती | कुर्वत् | करता हुआ |
5. शानच् प्रत्यय की तालिका (तीनों लिंगों में)
| क्र.सं. | धातु | पुल्लिंग (Masc.) | स्त्रीलिंग (Fem.) | नपुंसकलिंग (Neut.) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | सेव् | सेवमानः | सेवमाना | सेवमानम् | सेवा करता हुआ |
| 2 | लभ् | लभमानः | लभमाना | लभमानम् | प्राप्त करता हुआ |
| 3 | वृध् | वर्धमानः | वर्धमाना | वर्धमानम् | बढ़ता हुआ |
| 4 | रुच् | रोचमानः | रोचमाना | रोचमानम् | अच्छा लगता हुआ |
| 5 | कम्प् | कम्पमानः | कम्पमाना | कम्पमानम् | काँपता हुआ |
| 6 | मुद् | मोदमानः | मोदमाना | मोदमानम् | प्रसन्न होता हुआ |
| 7 | याच् | याचमानः | याचमाना | याचमानम् | माँगता हुआ |
| 8 | सह् | सहमानः | सहमाना | सहमानम् | सहन करता हुआ |
| 9 | वृत् | वर्तमानः | वर्तमान | वर्तमानम् | मौजूद/होता हुआ |
| 10 | मन् | मन्यमानः | मन्यमाना | मन्यमानम् | मानता हुआ |
⚡ पहचान की शॉर्ट ट्रिक्स (Easy Memory Tricks)
परीक्षा में शब्द देखते ही प्रत्यय पहचानने के लिए अंतिम अक्षरों (Endings) को याद रखें:
- 👉 क्त्वा: शब्द के अंत में "-त्वा", "-ित्वा" या "-ध्वा/ष्ट्वा" दिखे। (उदा. पठित्वा, गत्वा, दृष्ट्वा)
- 👉 ल्यप्: शुरुआत में उपसर्ग हो और अंत में "-य" हो। (उदा. आगत्य, प्रणम्य)
- 👉 तुमुन्: शब्द के अंत में "-तुम्", "-ितुम्" या "-ष्टुम्" दिखे। (उदा. पठितुम्, गन्तुम्, द्रष्टुम्)
- 👉 शतृ: पुल्लिंग शब्दों के अंत में "-न्" (जैसे: पठन्, गच्छन्) तथा स्त्रीलिंग में "-न्ती" मिले।
- 👉 शानच्: अंत में "-मानः" या "-मान" दिखे। (उदा. सेवमानः, लभमानः)
