संस्कृत प्रत्यय-विचारः - तव्यत्, अनीयर्, मतुप्, ठक्, त्व, तल्, टाप् एवं ङीप् (नियम, उदाहरण तालिका एवं अभ्यास प्रश्न-पत्रम्)

संस्कृत प्रत्यय-विचारः

कृत, तद्धित एवं स्त्री प्रत्ययानाम् नियम-उदाहरणानि तथा अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि

📌 प्रत्यय परिभाषा: जो शब्दांश किसी धातु (क्रिया) या शब्द के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उन्हें 'प्रत्यय' कहते हैं। मुख्य रूप से प्रत्यय तीन प्रकार के होते हैं— 1. कृत प्रत्यय, 2. तद्धित प्रत्यय, 3. स्त्री प्रत्यय।
1. कृत प्रत्ययाः (Dhatu / Verb Suffixes)

जो प्रत्यय धातुओं (मूल क्रियाओं) के अंत में जोड़े जाते हैं, उन्हें 'कृत प्रत्यय' कहते हैं। इनसे बने शब्दों को 'कृदन्त' कहा जाता है।

(क) तव्यत् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'तव्यत्' प्रत्यय का प्रयोग 'चाहिए' या 'योग्य' (Obligation/Fitness) के अर्थ में किया जाता है। तव्यत् प्रत्यय का केवल 'तव्य' शेष रहता है (अंतिम 'त्' का लोप हो जाता है)। इसके रूप तीनों लिंगों में चलते हैं:
पुंल्लिङ्गः: रामवत् (अन्त में 'तव्यः')
स्त्रीलिङ्गः: रमावत् (अन्त में 'तव्या')
नपुंसकलिङ्गः: फलवत् (अन्त में 'तव्यम्')
उदाहरण (त्रिषु लिङ्गेषु):
  1. पठ् + तव्यत् ➔ पठितव्यः (पुं०), पठितव्या (स्त्री०), पठितव्यम् (नपुं०)
  2. गम् + तव्यत् ➔ गन्तव्यः (पुं०), गन्तव्या (स्त्री०), गन्तव्यम् (नपुं०)
  3. कृ + तव्यत् ➔ कर्तव्यः (पुं०), कर्तव्या (स्त्री०), कर्तव्यम् (नपुं०)
  4. दृश् + तव्यत् ➔ द्रष्टव्यः (पुं०), द्रष्टव्या (स्त्री०), द्रष्टव्यम् (नपुं०)
  5. लिख् + तव्यत् ➔ लेखितव्यः (पुं०), लेखितव्या (स्त्री०), लेखितव्यम् (नपुं०)
📋 तव्यत् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः - त्रिषु लिङ्गेषु):
धातुःप्रत्ययःपुंल्लिङ्गःस्त्रीलिङ्गःनपुंसकलिङ्गः
पठ् (पढ़ना)तव्यत्पठितव्यःपठितव्यापठितव्यम्
गम् (जाना)तव्यत्गन्तव्यःगन्तव्यागन्तव्यम्
कृ (करना)तव्यत्कर्तव्यःकर्तव्याकर्तव्यम्
हस् (हँसना)तव्यत्हसितव्यःहसितव्याहसितव्यम्
दा (देना)तव्यत्दातव्यःदातव्यादातव्यम्
पा (पीना)तव्यत्पातव्यःपातव्यापातव्यम्
दृश् (देखना)तव्यत्द्रष्टव्यःद्रष्टव्याद्रष्टव्यम्
लिख् (लिखना)तव्यत्लेखितव्यःलेखितव्यालेखितव्यम्
श्रु (सुनना)तव्यत्श्रोतव्यःश्रोतव्याश्रोतव्यम्
खाद् (खाना)तव्यत्खादितव्यःखादितव्याखादितव्यम्
(ख) अनीयर् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'अनीयर्' प्रत्यय का प्रयोग भी 'चाहिए' या 'योग्य' के अर्थ में होता है। इसका केवल 'अनीय' शेष रहता है (अंतिम 'र्' का लोप हो जाता है)। इसके रूप भी तीनों लिंगों में बनते हैं:
पुंल्लिङ्गः: रामवत् (अन्त में 'अनीयः')
स्त्रीलिङ्गः: रमावत् (अन्त में 'अनीया')
नपुंसकलिङ्गः: फलवत् (अन्त में 'अनीयम्')
उदाहरण (त्रिषु लिङ्गेषु):
  1. पठ् + अनीयर् ➔ पठनीयः (पुं०), पठनीया (स्त्री०), पठनीयम् (नपुं०)
  2. कृ + अनीयर् ➔ करणीयः (पुं०), करणीया (स्त्री०), करणीयम् (नपुं०)
  3. गम् + अनीयर् ➔ गमनीयः (पुं०), गमनीया (स्त्री०), गमनीयम् (नपुं०)
  4. दृश् + अनीयर् ➔ दर्शनीयः (पुं०), दर्शनीया (स्त्री०), दर्शनीयम् (नपुं०)
  5. पूज् + अनीयर् ➔ पूजनीयः (पुं०), पूजनीया (स्त्री०), पूजनीयम् (नपुं०)
📋 अनीयर् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः - त्रिषु लिङ्गेषु):
धातुःप्रत्ययःपुंल्लिङ्गःस्त्रीलिङ्गःनपुंसकलिङ्गः
पठ् (पढ़ना)अनीयर्पठनीयःपठनीयापठनीयम्
कृ (करना)अनीयर्करणीयःकरणीयाकरणीयम्
दृश् (देखना)अनीयर्दर्शनीयःदर्शनीयादर्शनीयम्
पूज् (पूजना)अनीयर्पूजनीयःपूजनीयापूजनीयम्
स्मृ (याद करना)अनीयर्स्मरणीयःस्मरणीयास्मरणीयम्
रक्ष् (रक्षा करना)अनीयर्रक्षणीयःरक्षणीयारक्षणीयम्
वन्द् (वंदना करना)अनीयर्वन्दनीयःवन्दनीयावन्दनीयम्
पा (पीना)अनीयर्पानीयःपानीयापानीयम्
हस् (हँसना)अनीयर्हसनीयःहसनीयाहसनीयम्
श्रु (सुनना)अनीयर्श्रवणीयःश्रवणीयाश्रवणीयम्
2. तद्धित प्रत्ययाः (Noun / Adjective Suffixes)

जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण शब्दों के अंत में जोड़कर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें 'तद्धित प्रत्यय' कहते हैं।

(क) मतुप् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'मतुप्' प्रत्यय का प्रयोग 'वाला' या 'युक्त' (Possession) के अर्थ में होता है। मूल रूप से शब्द में 'मत्' या 'वत्' जुड़ता है। यदि अकारान्त/आकारान्त शब्द हों तो 'वत्' तथा अन्य स्वरान्त हों तो 'मत्' जुड़ता है। इसके रूप भी तीनों लिंगों में विभक्त होते हैं:
पुंल्लिङ्गः: भवान् वत् (अन्त में 'मान्' / 'वान्')
स्त्रीलिङ्गः: नदीवत् (अन्त में 'मती' / 'वती')
नपुंसकलिङ्गः: जगत्वत् (अन्त में 'मत्' / 'वत्')
उदाहरण (त्रिषु लिङ्गेषु):
  1. श्री + मतुप् ➔ श्रीमान् (पुं०), श्रीमती (स्त्री०), श्रीमत् (नपुं०)
  2. बुद्धि + मतुप् ➔ बुद्धिमान् (पुं०), बुद्धिमती (स्त्री०), बुद्धिमत् (नपुं०)
  3. धन + मतुप् ➔ धनवान् (पुं०), धनवती (स्त्री०), धनवत् (नपुं०)
  4. बल + मतुप् ➔ बलवान् (पुं०), बलवती (स्त्री०), बलवत् (नपुं०)
  5. विद्या + मतुप् ➔ विद्यावान् (पुं०), विद्यावती (स्त्री०), विद्यावत् (नपुं०)
📋 मतुप् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः - त्रिषु लिङ्गेषु):
शब्दःप्रत्ययःपुंल्लिङ्गःस्त्रीलिङ्गःनपुंसकलिङ्गः
श्रीमतुप्श्रीमान्श्रीमतीश्रीमत्
बुद्धिमतुप्बुद्धिमान्बुद्धिमतीबुद्धिमत्
शक्तिमतुप्शक्तिमान्शक्तिमतीशक्तिमत्
मतिमतुप्मतिमान्मतिमतीमतिमत्
धनमतुप्धनवान्धनवतीधनवत्
बलमतुप्बलवान्बलवतीबलवत्
ज्ञानमतुप्ज्ञानवान्ज्ञानवतीज्ञानवत्
गुणमतुप्गुणवान्गुणवतीगुणवत्
रूपमतुप्रूपवान्रूपवतीरूपवत्
दयामतुप्दयावान्दयावतीदयावत्
(ख) ठक् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'ठक्' प्रत्यय का प्रयोग 'संबंधी' (Relating to) या 'वेत्ता' के अर्थ में होता है। ठक् के स्थान पर 'इक' हो जाता है तथा शब्द के प्रथम स्वर में वृद्धि (अ➔आ, इ/ई➔ऐ, उ/ऊ➔औ) हो जाती है। विशेषण पद होने के कारण इसके रूप भी तीनों लिंगों में प्रयुक्त होते हैं:
पुंल्लिङ्गः: रामवत् (अन्त में 'इकः')
स्त्रीलिङ्गः: नदीवत् (अन्त में 'इकी')
नपुंसकलिङ्गः: फलवत् (अन्त में 'इकम्')
उदाहरण (त्रिषु लिङ्गेषु):
  1. धर्म + ठक् ➔ धार्मिकः (पुं०), धार्मिकी (स्त्री०), धार्मिकम् (नपुं०)
  2. समाज + ठक् ➔ सामाजिकः (पुं०), सामाजिकी (स्त्री०), सामाजिकम् (नपुं०)
  3. दिन + ठक् ➔ दैनिकः (पुं०), दैनिकी (स्त्री०), दैनिकम् (नपुं०)
  4. नगर + ठक् ➔ नागरिकः (पुं०), नागरिकी (स्त्री०), नागरिकम् (नपुं०)
  5. वेद + ठक् ➔ वैदिकः (पुं०), वैदिकी (स्त्री०), वैदिकम् (नपुं०)
📋 ठक् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः - त्रिषु लिङ्गेषु):
मूल शब्दःप्रत्ययःपुंल्लिङ्गःस्त्रीलिङ्गःनपुंसकलिङ्गः
धर्म (धर्म से संबंधित)ठक्धार्मिकःधार्मिकीधार्मिकम्
अर्थ (धन से संबंधित)ठक्आर्थिकःआर्थिकीआर्थिकम्
समाज (समाज से संबंधित)ठक्सामाजिकःसामाजिकीसामाजिकम्
वर्ष (वार्षिक)ठक्वार्षिकःवार्षिकीवार्षिकम्
दिन (प्रतिदिन का)ठक्दैनिकःदैनिकीदैनिकम्
नीति (नीति से संबंधित)ठक्नैतिकःनैतिकीनैतिकम्
वेद (वेदों से संबंधित)ठक्वैदिकःवैदिकीवैदिकम्
लोक (संसार से संबंधित)ठक्लौकिकःलौकिकीलौकिकम्
भूगोल (भूगोल से संबंधित)ठक्भौगोलिकःभौगोलिकीभौगोलिकम्
इतिहास (ऐतिहासिक)ठक्ऐतिहासिकःऐतिहासिकीऐतिहासिकम्
(ग) त्व प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'त्व' प्रत्यय का प्रयोग 'भाव' (Abstract Noun) प्रकट करने के लिए किया जाता है। त्व प्रत्ययांत शब्द सदा नपुंसकलिंग में होते हैं और अंत में 'त्वम्' जुड़ता है।
उदाहरण:
  1. देव + त्व ➔ देवत्वम् (देवता का भाव)
  2. महत् + त्व ➔ महत्त्वम् (महानता का भाव)
  3. कवि + त्व ➔ कवित्वम् (कवि का भाव)
  4. पशु + त्व ➔ पशुत्वम् (पशुता)
  5. गुरु + त्व ➔ गुरुत्वम् (भारीपन/गुरुता)
📋 त्व प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः):
मूल शब्दःप्रत्ययःनिष्पन्न पदम् (नपुंसकलिङ्गम्)अर्थः
देवत्वदेवत्वम्देवता होने का भाव
महत्त्वमहत्त्वम्महानता
कवित्वकवित्वम्कवियों जैसा गुण
पशुत्वपशुत्वम्पशु का भाव
गुरुत्वगुरुत्वम्भारीपन
लघुत्वलघुत्वम्हल्कापन
प्रभुत्वप्रभुत्वम्स्वामित्व
मानवत्वमानवत्वम्मानवता
जड़त्वजड़त्वम्अचेतनता
अमृतत्वअमृतत्वम्अमरता
(घ) तल् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: 'तल्' प्रत्यय का प्रयोग भी 'भाव' (Quality/State) दर्शाने के लिए होता है। तल् प्रत्ययांत शब्द सदा स्त्रीलिंग में होते हैं तथा अंत में 'ता' जुड़ता है।
उदाहरण:
  1. जन + तल् ➔ जनता (लोगों का समूह/भाव)
  2. सुन्दर + तल् ➔ सुन्दरता (सुंदर होने का भाव)
  3. मूर्ख + तल् ➔ मूर्खता (मूर्ख होने का भाव)
  4. सज्जन + तल् ➔ सज्जनता (सज्जनता का भाव)
  5. दुर्बल + तल् ➔ दुर्बलता (कमजोरी)
📋 तल् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः):
मूल शब्दःप्रत्ययःनिष्पन्न पदम् (स्त्रीलिङ्गम्)अर्थः
सुन्दरतल्सुन्दरतासुंदरता का भाव
मूर्खतल्मूर्खतामूर्खपन
सज्जनतल्सज्जनतासज्जन होने का भाव
दुर्बलतल्दुर्बलताकमजोरी
कुशलतल्कुशलतादक्षता
पवित्रतल्पवित्रतापवित्र होने का भाव
वीरतल्वीरताबहादुरी
एकतल्एकताएकता का भाव
मधुरतल्मधुरतामीठापन
निर्मलतल्निर्मलतास्वच्छता
3. स्त्री प्रत्ययाः (Feminine Suffixes)

पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग बनाने के लिए जिन प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें 'स्त्री प्रत्यय' कहते हैं।

(क) टाप् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: अकारान्त (अ से अंत होने वाले) पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग बनाने के लिए 'टाप्' का प्रयोग होता है। टाप् में ट् और प् का लोप होकर केवल 'आ' शेष रहता है। यदि शब्द के अंत में 'क' हो तो उससे पूर्व स्वर 'इ' हो जाता है (जैसे—बालक + टाप् = बालिका)।
उदाहरण:
  1. अज + टाप् ➔ अजा (बकरी)
  2. बाल + टाप् ➔ बाला (लड़की)
  3. बालक + टाप् ➔ बालिका (लड़की)
  4. सेवक + टाप् ➔ सेविका (दासी)
  5. शिक्षक + टाप् ➔ शिक्षिका (अध्यापिका)
📋 टाप् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः):
पुंल्लिङ्ग शब्दःप्रत्ययःस्त्रीलिङ्ग पदम्अर्थः
अजटाप्अजाबकरी
अश्वटाप्अश्वाघोड़ी
बालटाप्बालालड़की
प्रथमटाप्प्रथमापहली
चतुरटाप्चतुराचालाक स्त्री
बालकटाप्बालिकालड़की
सेवकटाप्सेविकासेविका
अध्यापकटाप्अध्यापिकाअध्यापिका
गायकटाप्गायिकागाने वाली
याचकटाप्याचिकामाँगने वाली
(ख) ङीप् प्रत्ययः
नियम एवं परिभाषा: ऋकारान्त (ऋ से अंत होने वाले), नकारान्त (न् से अंत होने वाले) तथा मतुप्/शतृ आदि प्रत्ययांत शब्दों को स्त्रीलिंग बनाने के लिए 'ङीप्' का प्रयोग होता है। ङीप् में से केवल दीर्घ 'ई' शेष बचता है।
उदाहरण:
  1. देव + ङीप् ➔ देवी
  2. नद + ङीप् ➔ नदी
  3. कर्तृ + ङीप् ➔ कर्त्री
  4. श्रीमत् + ङीप् ➔ श्रीमती
  5. राजन् + ङीप् ➔ राज्ञी
📋 ङीप् प्रत्यय रूप-तालिका (10 शब्दाः):
पुंल्लिङ्ग शब्दःप्रत्ययःस्त्रीलिङ्ग पदम्अर्थः
देवङीप्देवीदेवी
नदङीप्नदीनदी
मृगङीप्मृगीहिरनी
कर्तृङीप्कर्त्रीकरने वाली
दातृङीप्दात्रीदेने वाली
धीमत्ङीप्धीमतीबुद्धिमान् महिला
गुणवत्ङीप्गुणवतीगुणवान् महिला
गच्छत्ङीप्गच्छन्तीजाती हुई
राजन्ङीप्राज्ञीरानी
किशोरङीप्किशोरीकिशोरी
📝 प्रत्यय-अभ्यास-प्रश्न-पत्रम् (MCQ Test)
1. 'पठ् + तव्यत्' अस्य पदस्य स्त्रीलिङ्गे उचितं रूपं किम्?
  1. पठितव्यः
  2. पठितव्या
  3. पठितव्यम्
  4. पठनीयम्
2. 'दर्शनीयम्' अस्मिन् पदे कः प्रत्ययः अस्ति?
  1. तव्यत्
  2. अनीयर्
  3. अक्त
  4. शतृ
3. 'बुद्धिमान्' इत्यत्र कः प्रत्ययः प्रयुक्तः?
  1. शानच्
  2. ठक्
  3. मतुप्
  4. त्व
4. 'धर्म + ठक्' योजयित्वा स्त्रीलिङ्गे किं पदं भवति?
  1. धार्मिकः
  2. धार्मिकी
  3. धार्मिकम्
  4. धर्मत्वम्
5. 'देवत्वम्' अस्मिन् पदे कः तद्धित प्रत्ययः अस्ति?
  1. तल्
  2. त्व
  3. मतुप्
  4. ठक्
6. 'सुन्दरता' इत्यत्र कः प्रत्ययः अस्ति?
  1. त्व
  2. तल्
  3. टाप्
  4. ङीप्
7. 'बालक + टाप्' अस्य स्त्रीलिंग रूपं किम्?
  1. बालका
  2. बालकी
  3. बालिका
  4. बालिकी
8. 'देवी' अस्मिन् पदे कः स्त्री प्रत्ययः अस्ति?
  1. टाप्
  2. ङीप्
  3. ङीन्
  4. ती
9. 'वैदिकः' अस्य पदस्य प्रकृति-प्रत्यय विच्छेदः कः?
  1. वेद + ठक्
  2. वैद + इक
  3. वेद + इक
  4. वैदिक + तल्
10. 'गुण + मतुप्' इत्यस्य स्त्रीलिङ्ग पदं किम् भविष्यति?
  1. गुणवती
  2. गुणवाना
  3. गुणवन्ती
  4. गुणा
🔑 उत्तर-माला (Answer Key)
1. (B) पठितव्या
2. (B) अनीयर्
3. (C) मतुप्
4. (B) धार्मिका
5. (B) त्व
6. (B) तल्
7. (C) बालिका
8. (B) ङीप्
9. (A) वेद + ठक्
10. (A) गुणवती

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