🔄 संस्कृत-वाच्यपरिवर्तनम् (Sanskrit Voice Change)
कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम् - नियमाः, सोदाहरण-व्याख्या एवं 40 प्रमुख-धातु-रूपाणि।
क्रियायाः अभिव्यक्ति-प्रकारः 'वाच्यम्' इति कथ्यते। (वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है और क्रिया किसके अनुसार प्रयुक्त हुई है, उसे 'वाच्य' कहते हैं।)
संस्कृते त्रीणि वाच्यानि भवन्ति (संस्कृत में तीन वाच्य होते हैं):
- कर्तृवाच्यम् (Active Voice)
- कर्मवाच्यम् (Passive Voice)
- भाववाच्यम् (Impersonal Voice)
1. कर्तृवाच्यम् (Active Voice)
कर्ता प्रधानःअस्मिन् वाच्ये कर्ता प्रधानः भवति। क्रिया कर्तुः पुरुष-वचनानुसारम् प्रयुज्यते। (इसमें कर्ता मुख्य होता है तथा क्रिया कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है।)
- बालकः पुस्तकम् पठति। (बालक पुस्तक पढ़ता है।)
- अहम् ग्रामम् गच्छामि। (मैं गाँव जाता हूँ।)
- ते फलम् खादन्ति। (वे सब फल खाते हैं।)
- बालिकाः गीतम् गायन्ति। (लड़कियाँ गीत गाती हैं।)
- त्वम् पत्रम् लिखसि। (तुम पत्र लिखते हो।)
2. कर्मवाच्यम् (Passive Voice)
कर्म प्रधानम्अस्मिन् वाच्ये कर्म प्रधानम् भवति। क्रिया कर्मणः पुरुष-वचनानुसारम् प्रयुज्यते। (इसमें कर्म मुख्य होता है तथा क्रिया कर्म के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है।)
- बालकेन पुस्तकम् पठ्यते। (बालक द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।)
- मया ग्रामः गम्यते। (मेरे द्वारा गाँव जाया जाता है।)
- तैः फलानि खाद्यन्ते। (उन सब के द्वारा फल खाए जाते हैं।)
- बालिकाभिः गीतम् गीयते। (लड़कियों द्वारा गीत गाया जाता है।)
- त्वया पत्रम् लिख्यते। (तुम्हारे द्वारा पत्र लिखा जाता है।)
3. भाववाच्यम् (Impersonal Voice)
क्रिया (भाव) प्रधानाअस्मिन् वाच्ये कर्म न भवति (अकर्मक-धातुनां प्रयोगः)। क्रिया सदा प्रथम-पुरुष-एकवचने एव भवति। (इसमें कर्म नहीं होता। क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष एकवचन में ही रहती है।)
- बालकेन हस्यते। (बालक द्वारा हँसा जाता है।)
- मया गम्यते। (मेरे द्वारा जाया जाता है।)
- तैः क्रीड्यते। (उन सब के द्वारा खेला जाता है।)
- बालिकाभिः नृत्यते। (लड़कियों द्वारा नाचा जाता है।)
- त्वया सुप्यते। (तुम्हारे द्वारा सोया जाता है।)
1. सर्वनाम-पदानाम् परिवर्तनम् (Pronoun Transformation Chart):
| कर्तृवाच्य (प्रथमा विभक्ति) | कर्म/भाववाच्य (तृतीया विभक्ति) | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|
| सः (वह) | तेन | उसके द्वारा |
| तौ (वे दोनों) | ताभ्याम् | उन दोनों के द्वारा |
| ते (वे सब) | तैः | उन सब के द्वारा |
| सा (वह - स्त्री) | तया | उसके द्वारा |
| अहम् (मैं) | मया | मेरे द्वारा |
| वयम् (हम सब) | अस्माभिः | हम सब के द्वारा |
| त्वम् (तुम) | त्वया | तुम्हारे द्वारा |
| यूयम् (तुम सब) | युष्माभिः | तुम सब के द्वारा |
| रामः (राम) | रामेण | राम के द्वारा |
कर्मवाच्य एवं भाववाच्य बनाते समय धातु के मूल रूप के साथ 'य' जोड़कर आत्मनेपद (ते/न्ते) की तरह रूप बनाए जाते हैं। (जैसे: पठ् + य् + ते = पठ्यते)। नीचे प्रमुख 40 धातुओं के रूप और उनके उदाहरण दिए गए हैं:
| क्र. | मूल धातु | कर्तृवाच्य (लट्) | कर्मवाच्य/भाववाच्य | हिंदी अर्थ | उदाहरण वाक्य (कर्तृवाच्य ➔ कर्मवाच्य) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् (Read) | पठति | पठ्यते | पढ़ना | सः ग्रन्थम् पठति ➔ तेन ग्रन्थः पठ्यते। |
| 2 | गम् (Go) | गच्छति | गम्यते | जाना | अहं गृहं गच्छामि ➔ मया गृहं गम्यते। |
| 3 | लिख् (Write) | लिखति | लिख्यते | लिखना | बालकः पत्रं लिखति ➔ बालकेन पत्रं लिख्यते। |
| 4 | पा/पिब् (Drink) | पिबति | पीयते | पीना | त्वं जलं पिबसि ➔ त्वया जलं पीयते। |
| 5 | खाद् (Eat) | खादति | खाद्यते | खाना | ते फलानि खादन्ति ➔ तैः फलानि खाद्यन्ते। |
| 6 | दृश्/पश्य् (See) | पश्यति | दृश्यते | देखना | अहं चित्रं पश्यामि ➔ मया चित्रं दृश्यते। |
| 7 | कृ (Do) | करोति | क्रियते | करना | सः कार्यं करोति ➔ तेन कार्यं क्रियते। |
| 8 | दा/यच्छ् (Give) | यच्छति / ददाति | दीयते | देना | नृपः धनं ददाति ➔ नृपेण धनं दीयते। |
| 9 | हस् (Laugh) | हसति | हस्यते | हँसना | बालकः हसति ➔ बालकेन हस्यते। |
| 10 | क्रीड् (Play) | क्रीडति | क्रीड्यते | खेलना | ते कन्दुकेन क्रीडन्ति ➔ तैः कन्दुकेन क्रीड्यते। |
| 11 | भू (Be/Become) | भवति | भूयते | होना | सः प्रसन्नः भवति ➔ तेन प्रसन्नः भूयते। |
| 12 | स्था/तिष्ठ् (Stand/Stay) | तिष्ठति | स्थीयते | ठहरना/बैठना | अहम् अत्र तिष्ठामि ➔ मया अत्र स्थीयते। |
| 13 | पा/रक्ष् (Protect) | रक्षति | रक्ष्यते | रक्षा करना | सैनिकः देशं रक्षति ➔ सैनिकेन देशः रक्ष्यते। |
| 14 | स्मृ (Remember) | स्मरति | स्मर्यते | याद करना | छात्रः पाठं स्मरति ➔ छात्रेण पाठः स्मर्यते। |
| 15 | नी (Lead/Take) | नयति | नीयते | ले जाना | अजां नयति ➔ अजया नीयते। |
| 16 | जि (Win) | जयति | जीयते | जीतना | सः युद्धं जयति ➔ तेन युद्धं जीयते। |
| 17 | श्रु (Hear) | शृणोति | श्रूयते | सुनना | अहं कथां शृणोमि ➔ मया कथा श्रूयते। |
| 18 | गै (Sing) | गायति | गीयते | गाना | बालिका गीतं गायति ➔ बालिकया गीतं गीयते। |
| 19 | त्यज् (Abandon) | त्यजति | त्यज्यते | छोड़ना | सः दुर्जनं त्यजति ➔ तेन दुर्जनः त्यज्यते। |
| 20 | वद् (Speak) | वदति | उद्यते | बोलना | त्वं सत्यं वदसि ➔ त्वया सत्यं उद्यते। |
| 21 | पच् (Cook) | पचति | पच्यते | पकाना | माता अन्नं पचति ➔ मात्रा अन्नं पच्यते। |
| 22 | वस् (Dwell/Live) | वसति | उष्यते | रहना | सः नगरे वसति ➔ तेन नगरे उष्यते। |
| 23 | नम् (Bow/Salute) | नमति | नम्यते | नमस्कार करना | छात्रः गुरुं नमति ➔ छात्रेण गुरुः नम्यते। |
| 24 | प्रच्छ् (Ask) | पृच्छति | पृच्छ्यते | पूछना | सः प्रश्नं पृच्छति ➔ तेन प्रश्नः पृच्छ्यते। |
| 25 | स्वप् (Sleep) | स्वपिति | सुप्यते | सोना | बालकः रात्रौ स्वपिति ➔ बालकेन रात्रौ सुप्यते। |
| 26 | ह्र् (Take away/Steal) | हरति | ह्रियते | हरना/चुराना | चोरः धनं हरति ➔ चोरेण धनं ह्रियते। |
| 27 | ग्रह् (Hold/Accept) | गृह्णाति | गृह्यते | ग्रहण करना | सः जलं गृह्णाति ➔ तेन जलं गृह्यते। |
| 28 | ज्ञा (Know) | जानाति | ज्ञायते | जानना | अहं सत्यं जानामि ➔ मया सत्यं ज्ञायते। |
| 29 | नृत् (Dance) | नृत्यति | नृत्यते | नाचना | म्यूरः नृत्यति ➔ मयूरेण नृत्यते। |
| 30 | पत (Fall) | पतति | पत्यते | गिरना | पत्रं पतति ➔ पत्रेण पत्यते। |
| 31 | रच् (Create/Compose) | रचयति | रच्यते | रचना करना | कविः काव्यं रचयति ➔ कविना काव्यं रच्यते। |
| 32 | गण् (Count) | गणयति | गण्यते | गिनना | सः धनं गणयति ➔ तेन धनं गण्यते। |
| 33 | मन् (Think/Consider) | मन्यते | मन्यते | मानना | अहं त्वां विद्वान् मन्ये ➔ मया त्वं विद्वान् मन्यसे। |
| 34 | रुद् (Weep/Cry) | रोदिति | रुद्यते | रोना | शिशुः रोदिति ➔ शिशुना रुद्यते। |
| 35 | कुप् (Be Angry) | कुप्यति | कुप्यते | क्रोध करना | पिता कुप्यति ➔ पित्रा कुप्यते। |
| 36 | कथ् (Tell/Say) | कथयति | कथ्यते | कहना | पिता कथां कथयति ➔ पित्रा कथा कथ्यते। |
| 37 | अस् (Be) | अस्ति | भूयते | होना | अत्र शान्तिः अस्ति ➔ अत्र शान्तिः भूयते। |
| 38 | शी (Lie down/Sleep) | शेते | शय्यते | सोना/लेटना | सः शय्यायां शेते ➔ तेन शय्यायां शय्यते। |
| 39 | ब्रू/वच् (Speak) | ब्रवीति / वक्ति | उच्यते | बोलना | गुरुः वाक्यं ब्रवीति ➔ गुरुणा वाक्यं उच्यते। |
| 40 | इष् (Desire/Want) | इच्छति | इष्यते | चाहना | सः सफलताम् इच्छति ➔ तेन सफलता इष्यते। |
- नियम 1 (विभक्ति-परिवर्तनम्): कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय कर्ता को प्रथमा से तृतीया में और कर्म को द्वितीया से प्रथमा में बदलें।
- नियम 2 (कर्मानुसारम् क्रिया): कर्मवाच्य में क्रिया कर्ता के अनुसार नहीं, बल्कि कर्म के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है। (उदा: *मया पुस्तकानि पठ्यन्ते* - यहाँ 'पुस्तकानि' बहुवचन है, इसलिए 'पठ्यन्ते' आया)।
- नियम 3 (स्वर-परिवर्तनम्): कुछ धातुओं में कर्मवाच्य बनाते समय स्वर बदलते हैं:
- पा ➔ पीयते, दा ➔ दीयते, गै ➔ गीयते, स्था ➔ स्थीयते
- वद् ➔ उद्यते, वस् ➔ उष्यते, वच् ➔ उच्यते (सम्प्रसारण नियम)
- नियम 4 (भाववाच्यस्य क्रिया): भाववाच्य (अकर्मक धातु) में कर्म नहीं होता, इसलिए क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष एकवचन (जैसे: गम्यते, हस्यते, सुप्यते) ही रहेगी।
- नियम 5 (लकार परिवर्तन न करें): जिस लकार में कर्तृवाच्य का वाक्य है, कर्मवाच्य भी उसी लकार में बनेगा (लट् लकार है तो लट् में ही रहेगा)।
