संस्कृत-वर्णमाला
स्वर • व्यञ्जन • संयुक्त व्यञ्जन • वर्ण-विच्छेद • वर्ण-संयोग
📖 वर्णमाला का परिचय
किसी भी भाषा को पढ़ने और समझने के लिए उसकी वर्णमाला का ज्ञान आवश्यक होता है। वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
वर्ण भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई है।
संस्कृत वर्णमाला में मुख्य रूप से 46 वर्ण माने गए हैं—
1. स्वराः — स्वर
जिन वर्णों के उच्चारण में किसी अन्य वर्ण की सहायता की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें स्वर कहते हैं।
संस्कृत में 13 स्वर माने गए हैं। इन्हें तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है।
| प्रकार | स्वर | विशेषता |
|---|---|---|
| ह्रस्व स्वर | अ, इ, उ, ऋ, ऌ | उच्चारण में कम समय लगता है। |
| दीर्घ स्वर | आ, ई, ऊ, ॠ | ह्रस्व स्वर की अपेक्षा अधिक समय लगता है। |
| संयुक्त स्वर | ए, ऐ, ओ, औ | इनका निर्माण असमान स्वरों के मेल से माना जाता है। |
संस्कृत में ऌ का प्रयोग बहुत कम मिलता है। इसका प्रयोग मुख्यतः व्याकरणिक अध्ययन में देखने को मिलता है।
2. व्यञ्जनानि — व्यञ्जन
जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता के बिना नहीं किया जा सकता, उन्हें व्यञ्जन कहते हैं।
संस्कृत में 33 व्यञ्जन माने गए हैं। व्यञ्जन अपने मूल रूप में हलन्तयुक्त होते हैं, जैसे— क्, ख्, ग्, य्, र्, श् आदि।
① स्पर्श व्यञ्जन
क् से म् तक के 25 व्यञ्जन स्पर्श व्यञ्जन कहलाते हैं। इनका उच्चारण करते समय जिह्वा या मुख के किसी भाग का स्पर्श होता है।
| वर्ग | व्यञ्जन |
|---|---|
| क-वर्ग | क् ख् ग् घ् ङ् |
| च-वर्ग | च् छ् ज् झ् ञ् |
| ट-वर्ग | ट् ठ् ड् ढ् ण् |
| त-वर्ग | त् थ् द् ध् न् |
| प-वर्ग | प् फ् ब् भ् म् |
② अन्तःस्थ व्यञ्जन
जिन व्यञ्जनों के उच्चारण में वायु मुख के भीतर रहती हुई निकलती है, उन्हें अन्तःस्थ व्यञ्जन कहते हैं।
③ ऊष्म व्यञ्जन
जिन व्यञ्जनों के उच्चारण के समय मुख से गर्म वायु निकलती है, उन्हें ऊष्म व्यञ्जन कहते हैं।
3. अयोगवाह
अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) ऐसे चिह्न हैं जिनका प्रयोग संस्कृत-लेखन में होता है। ये न तो स्वतंत्र स्वर हैं और न ही व्यञ्जन। अतः इन्हें अयोगवाह कहा जाता है।
4. संयुक्त व्यञ्जन
दो या दो से अधिक व्यञ्जनों के मेल से बनने वाले रूपों को संयुक्त व्यञ्जन कहते हैं।
| वर्णों का मेल | संयुक्त रूप | उदाहरण |
|---|---|---|
| क् + ष् | क्ष | कक्षा |
| ज् + ञ् | ज्ञ | ज्ञान |
| त् + र् | त्र | पत्र |
| श् + र् | श्र | श्रम |
| द् + य् | द्य | विद्या |
| द् + ध् | द्ध | बुद्धि |
5. वर्ण-विच्छेद
किसी शब्द में उपस्थित स्वर और व्यञ्जनों को अलग-अलग करके लिखने की प्रक्रिया वर्ण-विच्छेद कहलाती है।
बालक = ब् + आ + ल् + अ + क् + अ
बालिका = ब् + आ + ल् + इ + क् + आ
मति = म् + अ + त् + इ
नदी = न् + अ + द् + ई
धेनु = ध् + ए + न् + उ
वधू = व् + अ + ध् + ऊ
पितृ = प् + इ + त् + ऋ
महत् = म् + अ + ह् + अ + त्
• व्यञ्जन को उसके मूल हलन्त रूप में लिखा जाता है।
• मात्रा के स्थान पर वास्तविक स्वर लिखा जाता है।
• जैसे— बा = ब् + आ
• ति = त् + इ
• दी = द् + ई
• धू = ध् + ऊ
6. वर्ण-संयोग
स्वर और व्यञ्जनों को उचित क्रम में जोड़कर शब्द बनाने की प्रक्रिया वर्ण-संयोग कहलाती है।
ज् + अ + न् + अ + क् + अ = जनक
य् + अ + ज् + ञ् + अ = यज्ञ
द् + ए + व् + अ + त् + आ = देवता
म् + इ + त् + र् + अ = मित्र
ल् + अ + त् + आ = लता
व् + इ + द् + य् + आ + ल् + अ + य् + अ = विद्यालय
प् + र् + अ + ग् + अ + त् + इ = प्रगति
📌 एक दृष्टि में
🔸 वर्ण — भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई है।
🔸 संस्कृत वर्णमाला में 46 वर्ण माने गए हैं।
🔸 13 स्वर — ह्रस्व, दीर्घ और संयुक्त।
🔸 33 व्यञ्जन — स्पर्श, अन्तःस्थ और ऊष्म।
🔸 दो व्यञ्जनों के मेल से संयुक्त व्यञ्जन बनते हैं।
🔸 स्वर और व्यञ्जनों को अलग करना वर्ण-विच्छेद कहलाता है।
🔸 स्वर और व्यञ्जनों को जोड़कर शब्द बनाना वर्ण-संयोग कहलाता है।
✍️ अभ्यासः
प्रश्न 1 — रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
- वर्णों के व्यवस्थित समूह को __________ कहते हैं।
- संस्कृत वर्णमाला में कुल __________ वर्ण हैं।
- संस्कृत में __________ स्वर माने गए हैं।
- संस्कृत में __________ व्यञ्जन माने गए हैं।
- दो व्यञ्जनों के मेल से __________ बनते हैं।
प्रश्न 2 — निम्नलिखित स्वरों को उचित वर्ग में लिखिए।
आ, इ, औ, ऋ, ई, ए, उ, ॠ, ऐ
ह्रस्व स्वर — __________
दीर्घ स्वर — __________
संयुक्त स्वर — __________
प्रश्न 3 — निम्नलिखित शब्दों का वर्ण-विच्छेद कीजिए।
- परिश्रम
- महिला
- प्रमाण
- कक्षः
- पुष्पम्
प्रश्न 4 — वर्ण-संयोग करके शब्द बनाइए।
- र् + आ + म् + अ
- प् + अ + श् + उ
- म् + अ + य् + ऊ + र् + अ + ः
- प् + उ + स् + त् + अ + क् + अ + म्
🎯 अध्ययन-सुझाव
पहले स्वर और व्यञ्जनों को पहचानना सीखें। इसके बाद वर्ण-विच्छेद का अभ्यास करें और अंत में अलग-अलग वर्णों को जोड़कर वर्ण-संयोग द्वारा शब्द बनाना सीखें। नियमित अभ्यास से संस्कृत के शुद्ध पठन और लेखन में सहायता मिलती है।
