संस्कृत व्याकरण में भूतकालिक क्रियाओं को प्रकट करने के लिए लङ् लकार (Past Tense) के अतिरिक्त कृदन्त प्रत्ययों का भी प्रयोग किया जाता है। महर्षि पाणिनि ने 'क्तः' और 'क्तवतु' दोनों प्रत्ययों को "निष्ठा" संज्ञा दी है (क्तक्तवतू निष्ठा)। इस पोस्ट में हम इन दोनों निष्ठा प्रत्ययों के नियम, प्रयोग एवं विस्तृत तालिकाओं का अध्ययन करेंगे।
1. क्तः (त) प्रत्यय (Ktah Pratyaya)
परिचय: क्तः प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल (Past Tense) की क्रियाओं के लिए होता है। सामान्यतः इसका प्रयोग कर्मवाच्य (Passive Voice) तथा भाववाच्य (Impersonal Voice) में किया जाता है। सकर्मक धातुओं से यह कर्म के अर्थ में और अकर्मक धातुओं से भाव के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
- 'क्तः' प्रत्यय में अनुबन्ध-लोप होकर केवल 'त' शेष बचता है।
- इसके रूप तीनों लिंगों में चलते हैं:
- पुल्लिंग: राम शब्द की तरह (अंत में -तः, उदा. पठितः)
- स्त्रीलिंग: रमा शब्द की तरह (अंत में -ता, उदा. पठिता)
- नपुंसकलिंग: फल शब्द की तरह (अंत में -तम्, उदा. पठितम्)
- सेट् धातुओं में 'त' से पहले 'इ' (इट्) का आगम होता है (जैसे: पठ् + क्तः = पठितः)।
- कुछ धातुओं में 'त' के स्थान पर 'क/ट' भी हो जाता है (जैसे: शुष् + क्तः = शुष्कः, नश् + क्तः = नष्टः, दृश् + क्तः = दृष्टः)।
प्रमुख 5 उदाहरण (वाक्य प्रयोग सह):
- पठ् + क्तः = पठितः — रामेण वेदः पठितः। (राम के द्वारा वेद पढ़ा गया।)
- गम् + क्तः = गतः — छात्रः विद्यालयं गतः। (छात्र विद्यालय गया।)
- कृ + क्तः = कृतः — मया कार्यं कृतम्। (मेरे द्वारा कार्य किया गया।)
- दृश् + क्तः = दृष्टः — बालकेन चित्रं दृष्टम्। (बालक के द्वारा चित्र देखा गया।)
- लिख् + क्तः = लिखितः — लतया पत्रं लिखितम्। (लता के द्वारा पत्र लिखा गया।)
2. क्तवतु (तवत्) प्रत्यय (Ktavatu Pratyaya)
परिचय: क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग भी भूतकाल (Past Tense) की क्रियाओं को दर्शाने के लिए होता है। परंतु इसका प्रयोग केवल कर्तृवाच्य (Active Voice) में कर्ता के अनुसार किया जाता है।
- 'क्तवतु' में से 'क्' और 'उ' का लोप होकर केवल 'तवत्' शेष बचता है।
- इसके रूप भी तीनों लिंगों में चलते हैं:
- पुल्लिंग: श्रीमत्/भगवत् की तरह (अंत में -वान्, उदा. पठितवान्)
- स्त्रीलिंग: नदी की तरह (अंत में -वती, उदा. पठितवती)
- नपुंसकलिंग: जगत् की तरह (अंत में -वत्, उदा. पठितवत्)
- कर्तृवाच्य का वाक्य होने के कारण क्रिया का लिंग और वचन कर्ता के अनुसार बदलता है।
प्रमुख 5 उदाहरण (वाक्य प्रयोग सह):
- पठ् + क्तवतु = पठितवान् — बालकः पाठं पठितवान्। (बालक ने पाठ पढ़ा।)
- गम् + क्तवतु = गतवान् / गतवती — बालिका गृहं गतवती। (बालिका घर गई।)
- लिख् + क्तवतु = लिखितवान् — छात्रः लेखं लिखितवान्। (छात्र ने लेख लिखा।)
- खाद् + क्तवतु = खादितवान् — त्वं फलं खादितवान्। (तुमने फल खाया।)
- कृ + क्तवतु = कृतवान् — सह कार्यं कृतवान्। (उसने कार्य किया।)
📊 निष्ठा प्रत्ययान्त रूप तालिका (40 उदाहरण)
1. क्तः (त) प्रत्यय तालिका (20 उदाहरण)
| क्र.सं. | धातु (अर्थ) | पुल्लिंग (Masc.) | स्त्रीलिंग (Fem.) | नपुंसकलिंग (Neut.) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् (पढ़ना) | पठितः | पठिता | पठितम् | पढ़ा गया |
| 2 | गम् (जाना) | गतः | गता | गतम् | गया |
| 3 | लिख् (लिखना) | लिखितः | लिखिता | लिखितम् | लिखा गया |
| 4 | खाद् (खाना) | खादितः | खादिता | खादितम् | खाया गया |
| 5 | कृ (करना) | कृतः | कृता | कृतम् | किया गया |
| 6 | दृश् (देखना) | दृष्टः | दृष्टा | दृष्टम् | देखा गया |
| 7 | पा (पीना) | पीतः | पीता | पीतम् | पिया गया |
| 8 | दा (देना) | दत्तः | दत्ता | दत्तम् | दिया गया |
| 9 | हस् (हँसना) | हसितः | हसिता | हसितम् | हँसा गया |
| 10 | श्रु (सुनना) | श्रुतः | श्रुता | श्रुतम् | सुना गया |
| 11 | स्था (ठहरना) | स्थितः | स्थिता | स्थितम् | ठहरा हुआ |
| 12 | नी (ले जाना) | नीतः | नीता | नीतम् | लाया/ले जाया गया |
| 13 | स्मृ (याद करना) | स्मृतः | स्मृता | स्मृतम् | याद किया गया |
| 14 | त्यज् (छोड़ना) | त्यक्तः | त्यक्ता | त्यक्तम् | त्यागा गया |
| 15 | ग्रह् (ग्रहण करना) | गृहीतः | गृहीता | गृहीतम् | लिया गया |
| 16 | पूज् (पूजना) | पूजितः | पूजिता | पूजितम् | पूजा गया |
| 17 | भी (डरना) | भीतः | भीता | भीतम् | डरा हुआ |
| 18 | प्रच्छ् (पूछना) | पृष्टः | पृष्टा | पृष्टम् | पूछा गया |
| 19 | लभ् (पाना) | लब्धः | लब्धा | लब्धम् | प्राप्त किया गया |
| 20 | हन् (मारना) | हतः | हता | हतम् | मारा गया |
2. क्तवतु (तवत्) प्रत्यय तालिका (20 उदाहरण)
| क्र.सं. | धातु (अर्थ) | पुल्लिंग (Masc.) | स्त्रीलिंग (Fem.) | नपुंसकलिंग (Neut.) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पठ् (पढ़ना) | पठितवान् | पठितवती | पठितवत् | पढ़ा |
| 2 | गम् (जाना) | गतवान् | गतवती | गतवत् | गया/गई |
| 3 | लिख् (लिखना) | लिखितवान् | लिखितवती | लिखितवत् | लिखा |
| 4 | खाद् (खाना) | खादितवान् | खादितवती | खादितवत् | खाया |
| 5 | कृ (करना) | कृतवान् | कृतवती | कृतवत् | किया |
| 6 | दृश् (देखना) | दृष्टवान् | दृष्टवती | दृष्टवत् | देखा |
| 7 | पा (पीना) | पीतवान् | पीतवती | पीतवत् | पिया |
| 8 | दा (देना) | दत्तवान् | दत्तवती | दत्तवत् | दिया |
| 9 | हस् (हँसना) | हसितवान् | हसितवती | हसितवत् | हँसा |
| 10 | श्रु (सुनना) | श्रुतवान् | श्रुतवती | श्रुतवत् | सुना |
| 11 | स्था (ठहरना) | स्थितवान् | स्थितवती | स्थितवत् | ठहरा |
| 12 | नी (ले जाना) | नीतवान् | नीतवती | नीतवत् | ले गया |
| 13 | स्मृ (याद करना) | स्मृतवान् | स्मृतवती | स्मृतवत् | याद किया |
| 14 | त्यज् (छोड़ना) | त्यक्तवान् | त्यक्तवती | त्यक्तवत् | छोड़ा |
| 15 | ग्रह् (ग्रहण करना) | गृहीतवान् | गृहीतवती | गृहीतवत् | लिया |
| 16 | पूज् (पूजना) | पूजितवान् | पूजितवती | पूजितवत् | पूजन किया |
| 17 | भी (डरना) | भीतवान् | भीतवती | भीतवत् | डरा |
| 18 | प्रच्छ् (पूछना) | पृष्टवान् | पृष्टवती | पृष्टवत् | पूछा |
| 19 | लभ् (पाना) | लब्धवान् | लब्धवती | लब्धवत् | पाया |
| 20 | हन् (मारना) | हतवान् | हतवती | हतवत् | मारा |
⚡ पहचान की शॉर्ट ट्रिक्स (Easy Memory Tricks)
परीक्षा में शब्द देखते ही प्रत्यय की पहचान करने के लिए अंतिम अक्षरों (Endings) को याद रखें:
- 👉 क्तः प्रत्यय पहचान:
- पुल्लिंग के अंत में "-तः" (पठितः, गतः) या "-ष्टः / -धः" (दृष्टः, लब्धः) दिखे।
- स्त्रीलिंग के अंत में "-ता" (पठिता, गता, दृष्टा)।
- नपुंसकलिंग के अंत में "-तम्" (पठितम्, गतम्, दृष्टम्)।
- 👉 क्तवतु प्रत्यय पहचान:
- पुल्लिंग के अंत में हमेशा "-वान्" दिखेगा। (उदा. पठितवान्, गतवान्, दृष्टवान्)
- स्त्रीलिंग के अंत में हमेशा "-वती" दिखेगा। (उदा. पठितवती, गतवती, दृष्टवती)
- नपुंसकलिंग के अंत में हमेशा "-वत्" दिखेगा। (उदा. पठितवत्, गतवत्, दृष्टवत्)
- 💡 स्मरण सूत्र: यदि अंत में वान् / वती दिखे तो आंख बंद करके 'क्तवतु' चुनें, और यदि तः / ता / तम् दिखे तो 'क्तः' चुनें!
