लिख् धातु रूप (Likh Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'लिख्' (लिखना) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
✍️ लिख् धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'लिख्' धातु का प्रयोग 'लिखना' (To Write) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी धातु है तथा भ्वादिगण के अंतर्गत आती है। किसी भी परीक्षा (जैसे CTET, UPTET, TGT, PGT या विद्यालयी परीक्षाओं) में लिख् धातु से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
1. लट् लकार - लिख् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में लिखने की क्रिया को प्रकट करने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | लिखति | लिखतः | लिखन्ति |
| मध्यम पुरुषः | लिखसि | लिखथः | लिखथ |
| उत्तम पुरुषः | लिखामि | लिखावः | लिखामः |
- बालकः पत्रं लिखति। — बालक पत्र लिखता है। (The boy writes a letter)
- त्वम् किं लिखसि? — तुम क्या लिखते हो? (What are you writing?)
- अहम् निबन्धं लिखामि। — मैं निबंध लिखता हूँ। (I write an essay)
2. लृट् लकार - लिख् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseविशेष ध्यान दें: लृट् लकार में 'लिख्' धातु का रूप गुण होकर 'लेखिष्यति' बनता है (लिखिष्यति नहीं होता):
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | लेखिष्यति | लेखिष्यतः | लेखिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | लेखिष्यसि | लेखिष्यथः | लेखिष्यथ |
| उत्तम पुरुषः | लेखिष्यामि | लेखिष्यावः | लेखिष्यामः |
- कविः काव्यं लेखिष्यति। — कवि काव्य लिखेगा।
- युवाम् उत्तरं लेखिष्यथः। — तुम दोनों उत्तर लिखोगे।
- वयम् कथां लेखिष्यामः। — हम सब कहानी लिखेंगे।
3. लङ् लकार - लिख् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseभूतकाल (बीते हुए समय) में लिखने की क्रिया को बताने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अलिखत् | अलिखताम् | अलिखन् |
| मध्यम पुरुषः | अलिखः | अलिखतम् | अलिखत |
| उत्तम पुरुषः | अलिखम् | अलिखाव | अलिखाम |
- छात्रः गृहकार्यम् अलिखत्। — छात्र ने गृहकार्य लिखा।
- ते लेखम् अलिखन्। — उन सबने लेख लिखा।
- अहम् पुस्तकम् अलिखम्। — मैंने पुस्तक लिखी।
4. लोट् लकार - लिख् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, उपदेश या प्रार्थना करने के अर्थ में लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | लिखतु | लिखताम् | लिखन्तु |
| मध्यम पुरुषः | लिख | लिखतम् | लिखत |
| उत्तम पुरुषः | लिखानि | लिखाव | लिखाम |
- सः उत्तरं लिखतु। — वह उत्तर लिखे। (Let him write the answer)
- त्वम् स्पष्टं लिख। — तुम साफ-साफ लिखो। (Write clearly)
- किम् अहम् लिखानि? — क्या मैं लिखूँ? (May I write?)
5. विधिलिङ् लकार - लिख् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, सम्भावना या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | लिखेत् | लिखेताम् | लिखेयुः |
| मध्यम पुरुषः | लिखेः | लिखेतम् | लिखेत |
| उत्तम पुरुषः | लिखेयम् | लिखेव | लिखेम |
- बालकः सुंदरं लिखेत्। — बालक को सुंदर लिखना चाहिए।
- त्वम् सत्यं लिखेः। — तुम्हें सत्य लिखना चाहिए।
- वयम् नित्यं लिखेम। — हमें रोज लिखना चाहिए।
📌 लिख् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- लृट् लकार में गुण सन्धि: लिख् धातु का लृट् लकार (भविष्यत् काल) में 'इ' का 'ए' हो जाता है, इसलिए रूप लेखिष्यति, लेखिष्यतः, लेखिष्यन्ति बनता है। परीक्षा में अक्सर यहीं गलती होती है!
- पठ् धातु से समानता: केवल लृट् लकार को छोड़कर शेष चारों लकारों (लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) के रूप बिलकुल 'पठ्' धातु की तरह ही चलते हैं (जैसे: पठति ➔ लिखति)।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में उपसर्ग की तरह 'अ' (अलिखत्) लगाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: लिख् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'लेखिष्यति' होता है।
उत्तर: 'लिख्' धातु का अर्थ संस्कृत में 'लिखना' (To Write) होता है।
