चल् धातु रूप (Chal Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'चल्' (चलना / To Walk) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
🚶♂️ चल् धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'चल्' धातु का प्रयोग 'चलना' (To Walk / To Move) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी धातु है तथा भ्वादिगण (प्रथम गण) के अंतर्गत आती है। यह एक अत्यंत सामान्य और व्यावहारिक धातु है जिसका प्रयोग संस्कृत सम्भाषण और अनुवाद में बहुतायत से होता है।
1. लट् लकार - चल् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में चलने या गति करने की क्रिया को प्रकट करने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | चलति | चलतः | चलन्ति |
| मध्यम पुरुषः | चलसि | चलथः | चलथ |
| उत्तम पुरुषः | चलामि | चलावः | चलामः |
- गजः मन्दं चलति। — हाथी धीरे चलता है। (The elephant walks slowly)
- त्वम् पुत्र चलसि? — तुम कहाँ चल रहे हो? (Where are you walking?)
- अहम् पादाभ्यां चलामि। — मैं पैरों से चलता हूँ। (I walk with feet)
2. लृट् लकार - चल् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseभविष्य में होने वाली चलने की क्रिया के लिए लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | चलिष्यति | चलिष्यतः | चलिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | चलिष्यसि | चलिष्यथः | चलिष्यथ |
| उत्तम पुरुषः | चलिष्यामि | चलिष्यावः | चलिष्यामः |
- पथिकः अग्रिमग्रामं चलिष्यति। — यात्री अगले गाँव की ओर चलेगा।
- युवाम् कुत्र चलिष्यथः? — तुम दोनों कहाँ चलोगे?
- वयम् प्रातः भ्रमणाय चलिष्यामः। — हम सब सुबह टहलने चलेंगे।
3. लङ् लकार - चल् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseभूतकाल (बीते हुए समय) में चलने की क्रिया को दर्शाने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अचलत् | अचलताम् | अचलन् |
| मध्यम पुरुषः | अचलः | अचलतम् | अचलत |
| उत्तम पुरुषः | अचलम् | अचलाव | अचलाम |
- यानम् मन्दम् अचलत्। — गाड़ी धीरे चली।
- ते वनम् अचलन्। — वे सब वन की ओर चले।
- अहम् तीव्रम् अचलम्। — मैं तेज़ी से चला।
4. लोट् लकार - चल् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, चलने की प्रेरणा देने या प्रार्थना के लिए लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | चलतु | चलताम् | चलन्तु |
| मध्यम पुरुषः | चल | चलतम् | चलत |
| उत्तम पुरुषः | चलानि | चलाव | चलाम |
- सः अग्रे चलतु। — वह आगे चले। (Let him walk ahead)
- त्वम् सावधानतया चल। — तुम सावधानी से चलो। (Walk carefully)
- किम् अहम् सह चलानि? — क्या मैं साथ चलूँ? (May I walk along?)
5. विधिलिङ् लकार - चल् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, सही राह पर चलने या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | चलेत् | चलेताम् | चलेयुः |
| मध्यम पुरुषः | चलेः | चलेतम् | चलेत |
| उत्तम पुरुषः | चलेयम् | चलेव | चलेम |
- जनः धर्ममार्गे चलेत्। — मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
- त्वम् सत्यस्य पथि चलेः। — तुम्हें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।
- वयम् नित्यम् प्रातः चलेम। — हमें रोज सुबह चलना (टहलना) चाहिए।
📌 चल् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- पठ् धातु की तरह सरलता: चल् धातु के रूप पूरी तरह से 'पठ्' धातु की तरह ही चलते हैं (जैसे: पठति ➔ चलति, पठिष्यति ➔ चलिष्यति)।
- लृट् लकार (भविष्यत्): चल् में 'इ' आगम होकर चलिष्यति, चलिष्यतः, चलिष्यन्ति रूप बनता है।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में उपसर्ग की तरह 'अ' (अचलत्) जुड़ता है।
- L-Shape Rule: लट् एवं लृट् लकार में विसर्ग (ः) L-आकार में प्रथम पुरुष द्विवचन, मध्यम पुरुष द्विवचन, उत्तम पुरुष द्विवचन एवं बहुवचन पर लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: चल् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन 'चलिष्यन्ति' होता है।
उत्तर: 'चल्' धातु भ्वादिगण की परस्मैपदी धातु है।
