नम् धातु रूप (Nam Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'नम्' (नमस्कार करना / झुकना) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
🙏 नम् धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'नम्' धातु का प्रयोग 'नमस्कार करना', 'प्रणाम करना' या 'झुकना' (To Bow / To Salute) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी अनिट् धातु है तथा भ्वादिगण के अंतर्गत आती है। धार्मिक श्लोकों, शिष्टाचार एवं संस्कृत अनुवाद में नम् धातु का अत्यंत व्यापक प्रयोग होता है।
1. लट् लकार - नम् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में प्रणाम करने या झुकने की क्रिया को दर्शाने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नमति | नमः | नमन्ति |
| मध्यम पुरुषः | नमसि | नमथः | नमथ |
| उत्तम पुरुषः | नमामि | नमावः | नमामः |
- भक्तः ईश्वरं नमति। — भक्त ईश्वर को प्रणाम करता है। (The devotee bows to God)
- त्वम् गुरुं नमसि। — तुम गुरु को प्रणाम करते हो। (You bow to the teacher)
- अहम् मातरम् नमामि। — मैं माता जी को प्रणाम करता हूँ। (I bow to my mother)
2. लृट् लकार - नम् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseविशेष ध्यान दें: नम् अनिट् धातु होने के कारण लृट् लकार में इसका रूप 'नंस्यति' बनता है (नमिष्यति नहीं होता):
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नंस्यति | नंस्यतः | नंस्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | नंस्यसि | नंस्यथः | नंस्यथ |
| उत्तम पुरुषः | नंस्यामि | नंस्यावः | नंस्यामः |
- शिष्यः शिक्षकं नंस्यति। — शिष्य शिक्षक को प्रणाम करेगा।
- युवाम् देवान् नंस्यथः। — तुम दोनों देवों को प्रणाम करोगे।
- वयम् पितरम् नंस्यामः। — हम सब पिता जी को प्रणाम करेंगे।
3. लङ् लकार - नम् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseभूतकाल में प्रणाम करने या झुकने की क्रिया का बोध कराने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अनमत् | अनमताम् | अनमन् |
| मध्यम पुरुषः | अनमः | अनमतम् | अनमत |
| उत्तम पुरुषः | अनमम् | अनमाव | अनमाम |
- बालकः गुरुम् अनमत्। — बालक ने गुरु को प्रणाम किया।
- तौ सूर्यम् अनमताम्। — उन दोनों ने सूर्य को प्रणाम किया।
- अहम् ईश्वरम् अनमम्। — मैंने ईश्वर को प्रणाम किया।
4. लोट् लकार - नम् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, आदरपूर्वक प्रणाम करने या प्रार्थना के लिए लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नमतु | नमताम् | नमन्तु |
| मध्यम पुरुषः | नम | नमसम् | नमत |
| उत्तम पुरुषः | नमानि | नमाव | नमाम |
- सः मातरम् नमतु। — वह माता को प्रणाम करे। (Let him bow to mother)
- त्वम् गुरुम् नम। — तुम गुरु को प्रणाम करो। (Bow to the teacher)
- किम् अहम् ईश्वरम् नमानि? — क्या मैं ईश्वर को प्रणाम करूँ? (May I bow to God?)
5. विधिलिङ् लकार - नम् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, शिष्टाचार या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नमेत् | नमेताम् | नमेयुः |
| मध्यम पुरुषः | नमेः | नमेतम् | नमेत |
| उत्तम पुरुषः | नमेयम् | नमेव | नमेम |
- सज्जनः ईश्वरं नमेत्। — सज्जन को ईश्वर को प्रणाम करना चाहिए।
- त्वम् वृद्धान् नमेः। — तुम्हें वृद्धजनों को प्रणाम करना चाहिए।
- वयम् मातरं पितरं च नमेम। — हमें माता और पिता को प्रणाम करना चाहिए।
📌 नम् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- लृट् लकार में मुख्य परिवर्तन: नम् धातु अनिट् होने के कारण लृट् लकार में 'म' का अनुस्वार ('ं') और फिर 'स' मिलकर नंस्यति, नंस्यतः, नंस्यन्ति रूप बनता है। विभिन्न संस्कृत परीक्षाओं (CTET/UPTET) में यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।
- पठ् धातु से समानता: लृट् लकार के अलावा अन्य चारों लकारों (लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) के रूप सामान्य 'पठ्' या 'चल्' धातु की तरह ही चलते हैं (जैसे: पठति ➔ नमति)।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में 'अ' उपसर्ग जुड़ता है (जैसे: अनमत्, अनमताम्, अनमन्)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: नम् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'नंस्यति' होता है।
उत्तर: 'नम्' धातु का अर्थ संस्कृत में 'नमस्कार करना', 'प्रणाम करना' या 'झुकना' होता है।
