हस् धातु रूप (Has Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'हस्' (हँसना / To Laugh) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
😊 हस् धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'हस्' धातु का प्रयोग 'हँसना' या 'मुस्कुराना' (To Laugh / To Smile) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी सेट् धातु है तथा भ्वादिगण (प्रथम गण) के अंतर्गत आती है। यह एक अत्यंत व्यावहारिक और सरल धातु है, जिसका उपयोग दैनिक सम्भाषण, कथाओं तथा परीक्षाओं में व्यापक रूप से होता है।
1. लट् लकार - हस् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में हँसने की क्रिया को दर्शाने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | हसति | हसतः | हसन्ति |
| मध्यम पुरुषः | हससि | हसथः | हसथ |
| उत्तम पुरुषः | हसामि | हसावः | हसामः |
- बालकः उच्चैः हसति। — बालक ज़ोर से हँसता है। (The boy laughs aloud)
- त्वम् किमर्थम् हससि? — तुम क्यों हँस रहे हो? (Why are you laughing?)
- अहम् आनन्देन हसामि। — मैं आनंद से हँसता हूँ। (I laugh with joy)
2. लृट् लकार - हस् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseभविष्य में होने वाली हँसने की क्रिया को व्यक्त करने के लिए लृट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | हसिष्यति | हसिष्यतः | हसिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | हसिष्यसि | हसिष्यथः | हसिष्यथ |
| उत्तम पुरुषः | हसिष्यामि | हसिष्यावः | हसिष्यामः |
- जनाः नाटकं दृष्ट्वा हसिष्यन्ति। — लोग नाटक देखकर हँसेंगे।
- युवाम् पुनः हसिष्यथः। — तुम दोनों फिर हँसोगे।
- वयम् प्रहसनम् श्रुत्वा हसिष्यामः। — हम सब चुटकुला सुनकर हँसेंगे।
3. लङ् लकार - हस् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseबीते हुए समय (भूतकाल) में हँसने की क्रिया को प्रकट करने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अहसत् | अहसताम् | अहसन् |
| मध्यम पुरुषः | अहसः | अहसतम् | अहसत |
| उत्तम पुरुषः | अहसम् | अहसाव | अहसाम |
- सः हास्यकथां श्रुत्वा अहसत्। — वह हास्य कहानी सुनकर हँसा।
- ते सर्वे उच्चैः अहसन्। — वे सब ज़ोर-ज़ोर से हँसे।
- अहम् वृथा न अहसम्। — मैं बिना बात के नहीं हँसा।
4. लोट् लकार - हस् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, हँसने की अनुमति देने या प्रसन्नता प्रकट करने हेतु लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | हसतु | हसताम् | हसन्तु |
| मध्यम पुरुषः | हस | हसतम् | हसत |
| उत्तम पुरुषः | हसानि | हसाव | हसाम |
- शिशुः मुदा हसतु। — बच्चा खुशी से हँसे। (Let the child laugh with joy)
- त्वम् सदा हस। — तुम हमेशा हँसो/मुस्कुराओ। (Always laugh/smile)
- किम् अहम् हसानि? — क्या मैं हँसू? (May I laugh?)
5. विधिलिङ् लकार - हस् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, प्रसन्न रहने की सलाह या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | हसेत् | हसेताम् | हसेयुः |
| मध्यम पुरुषः | हसेः | हसेतम् | हसेत |
| उत्तम पुरुषः | हसेयम् | हसेव | हसेम |
- मानवः सर्वदा प्रसन्नः हसेत्। — मनुष्य को सदैव प्रसन्न होकर हँसना चाहिए।
- त्वम् परेषाम् उपहासे न हसेः। — तुम्हें दूसरों के उपहास पर नहीं हँसना चाहिए।
- वयम् मिलित्वा हसेम। — हम सबको मिलकर हँसना चाहिए।
📌 हस् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- पठ् और चल् धातु से पूर्ण समानता: हस् धातु के पाँचों लकारों के रूप बिल्कुल 'पठ्' तथा 'चल्' धातु की तरह ही बनते हैं (जैसे: पठति ➔ चलति ➔ हसति)।
- लृट् लकार (भविष्यत्): हस् में 'इ' आगम होकर हसिष्यति, हसिष्यतः, हसिष्यन्ति रूप बनता है।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में उपसर्ग की तरह 'अ' (अहसत्) लगता है।
- L-Shape विसर्ग नियम: लट् एवं लृट् लकार में विसर्ग (ः) L-आकार में प्रथम पुरुष द्विवचन, मध्यम पुरुष द्विवचन, उत्तम पुरुष द्विवचन एवं बहुवचन पर लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: हस् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन 'हसिष्यन्ति' होता है।
उत्तर: 'हस्' धातु का संस्कृत में अर्थ 'हँसना' या 'मुस्कुराना' (To Laugh) होता है।
