गम् (गच्छ्) धातु रूप (Gam Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'गम्' (गच्छ्) (जाना / To Go) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
🚶♂️ गम् (गच्छ्) धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'गम्' धातु का प्रयोग 'जाना' (To Go) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी धातु है तथा भ्वादिगण (प्रथम गण) के अंतर्गत आती है। गम् धातु में एक मुख्य विशेषता यह है कि लट्, लङ्, लोट् तथा विधिलिङ् लकार में 'गम्' के स्थान पर 'गच्छ्' आदेश हो जाता है (जैसे: गच्छति, अगच्छत्), किन्तु लृट् लकार (भविष्यत् काल) में यह आदेश नहीं होता और रूप 'गमिष्यति' ही बनता है।
1. लट् लकार - गम् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में जाने की क्रिया को प्रकट करने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है (इसमें 'गच्छ्' रूप बनता है):
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| मध्यम पुरुषः | गच्छसि | गच्छथः | गच्छथ |
| उत्तम पुरुषः | गच्छामि | गच्छावः | गच्छामः |
- बालकः विद्यालयं गच्छति। — बालक विद्यालय जाता है। (The boy goes to school)
- त्वम् कुत्र गच्छसि? — तुम कहाँ जा रहे हो? (Where are you going?)
- अहम् गृहं गच्छामि। — मैं घर जाता हूँ। (I go home)
2. लृट् लकार - गम् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseविशेष ध्यान दें: लृट् लकार (भविष्यत् काल) में गम् धातु को 'गच्छ्' आदेश नहीं होता, बल्कि मूल रूप 'गम्' से ही 'गमिष्यति' रूप बनता है ('गच्छिष्यति' नहीं होता):
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | गमिष्यति | गमिष्यतः | गमिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | गमिष्यसि | गमिष्यथः | गमिष्यथ |
| उत्तम पुरुषः | गमिष्यामि | गमिष्यावः | गमिष्यामः |
- सः श्वः नगरं गमिष्यति। — वह कल नगर जाएगा।
- युवाम् मन्दिरम् गमिष्यथः? — तुम दोनों मंदिर जाओगे?
- वयम् ग्रामं गमिष्यामः। — हम सब गाँव जाएँगे।
3. लङ् लकार - गम् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseभूतकाल (बीते हुए समय) में जाने की क्रिया को दर्शाने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अगच्छत् | अगच्छताम् | अगच्छन् |
| मध्यम पुरुषः | अगच्छः | अगच्छतम् | अगच्छत |
| उत्तम पुरुषः | अगच्छम् | अगच्छाव | अगच्छाम |
- रामः वनम् अगच्छत्। — राम वन गए।
- ते सर्वे गृहम् अगच्छन्। — वे सब घर गए।
- अहम् ह्यः विद्यालयम् अगच्छम्। — मैं कल विद्यालय गया था।
4. लोट् लकार - गम् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, जाने का निर्देश देने या अनुमति लेने के लिए लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | गच्छतु | गच्छताम् | गच्छन्तु |
| मध्यम पुरुषः | गच्छ | गच्छतम् | गच्छत |
| उत्तम पुरुषः | गच्छानि | गच्छाव | गच्छाम |
- सः स्वगृहं गच्छतु। — वह अपने घर जाए। (Let him go home)
- त्वम् झटिति गच्छ। — तुम शीघ्र जाओ। (You go quickly)
- किम् अहम् प्रविश्य गच्छानि? — क्या मैं प्रवेश कर के जाऊँ? (May I enter and go?)
5. विधिलिङ् लकार - गम् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, सम्भावना या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | गच्छेत् | गच्छेताम् | गच्छेयुः |
| मध्यम पुरुषः | गच्छेः | गच्छेतम् | गच्छेत |
| उत्तम पुरुषः | गच्छेयम् | गच्छेव | गच्छेम |
- छात्रः समयतः विद्यालयं गच्छेत्। — छात्र को समय पर विद्यालय जाना चाहिए।
- त्वम् सत्यस्य मार्गं गच्छेः। — तुम्हें सत्य के मार्ग पर जाना चाहिए।
- वयम् नित्यम् भ्रमणाय गच्छेम। — हमें रोज टहलने जाना चाहिए।
📌 गम् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- गम् ➔ गच्छ् परिवर्तन: गम् धातु को लट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् में 'गच्छ्' आदेश होता है (जैसे: गच्छति, अगच्छत्, गच्छतु, गच्छेत्)।
- लृट् लकार में मुख्य अपवाद (सबसे महत्वपूर्ण): लृट् लकार (भविष्यत् काल) में 'गच्छ्' आदेश नहीं होता है। यहाँ मूल 'गम्' धातु में सेट् आगम होकर गमिष्यति, गमिष्यतः, गमिष्यन्ति रूप बनता है। CTET, UPTET, TGT/PGT में यह प्रश्न बहुत अधिक पूछा जाता है।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में उपसर्ग की तरह 'अ' (अगच्छत्) जुड़ता है।
- L-Shape विसर्ग नियम: लट् एवं लृट् लकार में विसर्ग (ः) L-आकार में प्रथम पुरुष द्विवचन, मध्यम पुरुष द्विवचन, उत्तम पुरुष द्विवचन एवं बहुवचन पर लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: गम् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'गमिष्यति' होता है।
उत्तर: गम् धातु को लट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् लकार में 'गच्छ्' आदेश होता है।
