नृत् धातु रूप (Nrit Dhatu Roop in Sanskrit)
संस्कृत भाषा में 'नृत्' (नाचना / To Dance) परस्मैपद धातु के पाँचों लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट् एवं विधिलिङ्) के शब्द रूप, हिंदी अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
💃 नृत् धातु परिचय (Introduction)
संस्कृत व्याकरण में 'नृत्' धातु का प्रयोग 'नाचना' या 'नृत्य करना' (To Dance) के अर्थ में किया जाता है। यह परस्मैपदी धातु है तथा दिवादिगण (चतुर्थ गण) के अंतर्गत आती है। दिवादिगणीय होने के कारण लट् लकार में 'श्यन्' विकरण जुड़कर इसका रूप 'नृत्यति' बनता है, जबकि लृट् लकार में 'ऋ' को गुण होकर 'नर्तिष्यति' रूप निष्पन्न होता है।
1. लट् लकार - नृत् धातु (वर्तमान काल)
Present Tenseवर्तमान समय में नृत्य करने की क्रिया को प्रकट करने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नृत्यति | नृत्यतः | नृत्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | नृत्यसि | नृत्यथः | नृत्यथ |
| उत्तम पुरुषः | नृत्यामि | नृत्यावः | नृत्यामः |
- मयूरः मञ्चे नृत्यति। — मोर मंच पर नाचता है। (The peacock dances on the stage)
- त्वम् सुंदरम् नृत्यसि। — तुम सुंदर नाचते/नाचती हो। (You dance beautifully)
- अहम् आनन्देन नृत्यामि। — मैं आनंद से नाचता हूँ। (I dance with joy)
2. लृट् लकार - नृत् धातु (भविष्यत् काल)
Future Tenseविशेष ध्यान दें: लृट् लकार में 'नृत्' धातु के 'ऋ' को गुण आदेश ('अर्') होकर 'नर्तिष्यति' रूप बनता है (नृत्यिष्यति नहीं होता):
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नर्तिष्यति | नर्तिष्यतः | नर्तिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुषः | नर्तिष्यसि | नर्तिष्यथः | नर्तिष्यथ |
| उत्तम पुरुषः | नर्तिष्यामि | नर्तिष्यावः | नर्तिष्यामः |
- नर्तकी सभायाम् नर्तिष्यति। — नर्तकी सभा में नाचेगी।
- युवाम् उत्सवे नर्तिष्यथः? — तुम दोनों उत्सव में नाचोगे?
- वयम् मयूरैः सह नर्तिष्यामः। — हम सब मोरों के साथ नाचेंगे।
3. लङ् लकार - नृत् धातु (अनद्यतन भूतकाल)
Past Tenseभूतकाल (बीते हुए समय) में नाचने की क्रिया को दर्शाने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | अनृत्यत् | अनृत्यताम् | अनृत्यन् |
| मध्यम पुरुषः | अनृत्यः | अनृत्यतम् | अनृत्यत |
| उत्तम पुरुषः | अनृत्यम् | अनृत्याव | अनृत्याम |
- मयूरः वर्षे अनृत्यत्। — मोर वर्षा में नाचा।
- बालिकाः मञ्चे अनृत्यन्। — बालिकाओं ने मंच पर नृत्य किया।
- अहम् ह्यः अनृत्यम्। — मैं कल नाचा।
4. लोट् लकार - नृत् धातु (आज्ञा / प्रार्थना)
Imperative Moodआज्ञा देने, नृत्य का निर्देश देने या अनुमति लेने के लिए लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नृत्यतु | नृत्यताम् | नृत्यन्तु |
| मध्यम पुरुषः | नृत्य | नृत्यतम् | नृत्यत |
| उत्तम पुरुषः | नृत्यानि | नृत्याव | नृत्याम |
- बालकः मुदा नृत्यतु। — बालक प्रसन्नता से नाचे। (Let the boy dance with joy)
- त्वम् इतः नृत्य। — तुम यहाँ नाचो। (You dance here)
- किम् अहम् मञ्चे नृत्यानि? — क्या मैं मंच पर नाचूँ? (May I dance on the stage?)
5. विधिलिङ् लकार - नृत् धातु (चाहिए अर्थ में)
Potential Moodचाहिए अर्थ, कला प्रदर्शन या परामर्श देने के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुषः | नृत्येत् | नृत्येताम् | नृत्येयुः |
| मध्यम पुरुषः | नृत्येः | नृत्येतम् | नृत्येत |
| उत्तम पुरुषः | नृत्येयम् | नृत्येव | नृत्येम |
- कन्यका तालानुसारेण नृत्येत्। — कन्या को ताल के अनुसार नाचना चाहिए।
- त्वम् उत्सवे नृत्येः। — तुम्हें उत्सव में नाचना चाहिए।
- वयम् सर्वदा प्रसन्नतया नृत्येम। — हमें हमेशा प्रसन्नता से नाचना चाहिए।
📌 नृत् धातु रूप याद रखने के मुख्य नियम (Memory Tips)
- दिवादिगण का प्रभाव (लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्): नृत् धातु दिवादिगण की धातु है, इसलिए इसमें 'श्यन्' प्रत्यय का '्य' जुड़ता है (जैसे: नृत् + य + ति = नृत्यति)।
- लृट् लकार में मुख्य परिवर्तन (गुण संधि): लृट् लकार (भविष्यत् काल) में 'ऋ' को गुण होकर 'अर्' और सेट् आगम ('इ') होकर नर्तिष्यति, नर्तिष्यतः, नर्तिष्यन्ति रूप बनता है। विभिन्न संस्कृत प्रतियोगी परीक्षाओं (TGT/PGT/CTET) में यह रूप बार-बार पूछा जाता है।
- लङ् लकार (भूतकाल): इसके प्रारंभ में उपसर्ग की तरह 'अ' (अनृत्यत्) जुड़ता है।
- L-Shape विसर्ग नियम: लट् एवं लृट् लकार में विसर्ग (ः) L-आकार में प्रथम पुरुष द्विवचन, मध्यम पुरुष द्विवचन, उत्तम पुरुष द्विवचन एवं बहुवचन पर लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: नृत् धातु का लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'नर्तिष्यति' होता है।
उत्तर: 'नृत्' धातु दिवादिगण (चतुर्थ गण) की परस्मैपदी धातु है।
