चतुर्थः पाठः : न खलु वयस्तेजसो हेतुः
कक्षा 9 - संस्कृत (शारदा) | सम्पूर्ण-गद्यांशार्थः, हिन्दी-अनुवादः, शब्दार्थाः एवं अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि
📌 पाठ-परिचयः: 'न खलु वयस्तेजसो हेतुः' (अर्थात् तेज और पराक्रम के लिए अवस्था या आयु कारण नहीं होती)। प्रस्तुत पाठ में भारत के अमर बाल क्रान्तिवीर हुतात्मा खुदीराम बोस के देशभक्तिपूर्ण जीवनवृत्त का वर्णन किया गया है। जिन्होंने अल्पायु में ही देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
भारतस्य स्वतन्त्रतासङ्ग्रामे सशस्त्रान्दोलने बङ्गप्रान्तः अग्रेसरः आसीत्। तस्मिन् बङ्गप्रान्ते मेदिनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमे वर्षे (1889) दिसम्बरमासस्य तृतीये दिनाङ्के खुदीरामस्य जन्म अभवत्। तस्य जनकस्य नाम त्रैलोक्यनाथः इति, जनन्याः नाम लक्ष्मीप्रिया देवी च आसीत्। खुदीरामस्य बाल्यकाले एव तस्य पितरौ दिवङ्गतौ। अतः तस्य अग्रजया अपरूपादेव्या एव खुदीरामस्य पालनं पोषणं च कृतम्। बाल्यकालतः एव खुदीरामः असाधारणः आसीत्। साधारणबालानाम् इव क्रीडादिषु तस्य मनः न रमते स्म। सः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म।
🇮🇳 हिन्दी-अनुवादः:
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सशस्त्र आंदोलन में बंगाल प्रांत आगे था। उस बंगाल प्रांत के मेदिनीपुर नामक जिले के मोहाबनी गाँव में 3 दिसंबर 1889 को खुदीराम का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। खुदीराम के बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया। इसलिए उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी द्वारा ही खुदीराम का पालन-पोषण किया गया। बचपन से ही खुदीराम असाधारण थे। साधारण बालकों की तरह खेलकूद में उनका मन नहीं लगता था। वे देशवासियों पर हो रहे अत्याचारों को देखकर दुःखी (व्यथित) होते थे।
📖 गद्यांश-1 कठिन-शब्दार्थाः:
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-पर्यायः / व्युत्पत्तिः | हिन्दी-अर्थः |
| अग्रेसरः | प्रथमः / अग्रगणी | आगे रहने वाला |
| दिवङ्गतौ | मृत्युं प्राप्तौ | स्वर्गवासी हो गए / निधन हो गया |
| अग्रजया | ज्येष्ठभगिन्या | बड़ी बहन के द्वारा |
| असाधारणः | न साधारणः | असामान्य / विशेष |
| व्यथितः | दुःखितः | दुःखी / पीड़ित |
बङ्गप्रान्ते क्रान्तिवीराणां महद्भिः गुप्तगतिविधिभिः आङ्ग्लाः संत्रस्ताः आसन्। भारतस्य तात्कालिकः वायसरायः कर्जनः बङ्गप्रान्तस्य एतत् वीरत्वं दमयितुम्, उत्साहं ध्वंसयितुं, देशभक्तिं मर्दयितुं च बङ्गप्रान्तस्य पन्थाधारितं विभजनं करणीयम् इति निश्चितवान्। पञ्चाधिक-नवदशशततमे वर्षे (1905) तेन बङ्गप्रान्तः भागद्वये विभाजितः। तस्य एतया कृत्या न केवलं बङ्गप्रान्ते अपि तु सर्वस्मिन् देशे जनान्दोलनं प्रवृत्तम्। बङ्गभङ्ग-आन्दोलनमिति तस्य जनान्दोलनस्य नाम। यद्यपि खुदीरामः तस्मिन् समये केवलं पञ्चदशवर्षीयः तथापि देशभक्तेः भावनया सः प्रेरितः सन् जनान्दोलने कूर्दितः। आङ्ग्लानां पारतन्त्र्यशृङ्खलातः वन्दनीयभारतमातुः मोचनं करणीयम् इत्येव सङ्कल्पः आसीत्। अतः सः नवमीं कक्षाम् अपि पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। यतोहि देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।
🇮🇳 हिन्दी-अनुवादः:
बंगाल प्रांत में क्रांतिवीरों की बड़ी गुप्त गतिविधियों से अंग्रेज भयभीत (संत्रस्त) थे। भारत के तत्कालीन वायसराय कर्जन ने बंगाल प्रांत के इस साहस का दमन करने, उत्साह को नष्ट करने और देशभक्ति को कुचलने के लिए संप्रदाय (धर्म) के आधार पर बंगाल प्रांत का विभाजन करने का निश्चय किया। 1905 में उसके द्वारा बंगाल प्रांत को दो भागों में विभाजित कर दिया गया। उसके इस कार्य से न केवल बंगाल प्रांत में बल्कि पूरे देश में जनांदोलन शुरू हो गया। उस जनांदोलन का नाम 'बंग-भंग आंदोलन' था। यद्यपि खुदीराम उस समय केवल पंद्रह वर्ष के थे, फिर भी देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वे जनांदोलन में कूद पड़े। अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से पूज्य भारत माता को मुक्त कराना ही उनका संकल्प था। इसलिए वे नवीं कक्षा भी पूरी नहीं कर सके, क्योंकि देशभक्तों का जीवन राष्ट्र को समर्पित होता है।
📖 गद्यांश-2 कठिन-शब्दार्थाः:
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-पर्यायः / व्युत्पत्तिः | हिन्दी-अर्थः |
| संत्रस्ताः | भीताः | भयभीत / आतंकित |
| दमयितुम् | दमनं कर्तुम् | दबाने के लिए |
| पन्थाधारितम् | सम्प्रदायाधारितम् | धर्म/संप्रदाय पर आधारित |
| पारतन्त्र्यशृङ्खलातः | दास्यबन्धनात् | गुलामी की जंजीरों से |
| मोचनम् | मुक्तिम् | छुड़ाना / मुक्त कराना |
बालानां संघटनं कृत्वा सः पदयात्राम् आयोजयति स्म। तस्यां यात्रायां देशभक्तियुतानि गीतानि, वन्दे मातरम् चेत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म। सः पदयात्रामाध्यमेन लोकजागरणविषयकाणि पत्रकाणि जनेषु वितरति स्म। कदाचित् खुदीरामः पत्रकवितरणसमये आङ्ग्लानां हस्तगतः जातः। किन्तु सामर्थ्यसम्पन्नः खुदीरामः आङ्ग्लानां ताडनं कृत्वा ततः निरगच्छत्। बङ्गप्रान्ते क्रान्तिवीरैः सञ्चालितानि बहूनि गुप्तमण्डलानि आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म। कस्यचित् गुप्तमण्डलस्य सञ्चालकः आसीत् सत्येन्द्रनाथः। खुदीरामः स्वमित्रेण प्रफुल्लेन सह गत्वा सत्येन्द्रनाथेन अमिलत्। सत्येन्द्रनाथः उपादिशत् - "क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत् इति"। तस्मात् गुप्तप्रशिक्षणकेन्द्रात् द्वाभ्याम् अष्टमासात्मकं प्रशिक्षणं प्राप्तम्। भुशुण्डिसञ्चालने अपि तौ अचिरादेव प्रवीणौ सञ्जातौ। राणाप्रतापस्य चरित्रेण प्रेरितः खुदीरामः प्रतिज्ञातवान् यत् 'यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि' इति।
🇮🇳 हिन्दी-अनुवादः:
बालकों का संगठन बनाकर वे पदयात्रा आयोजित करते थे। उस यात्रा में देशभक्ति के गीत और 'वंदे मातरम्' आदि के नारे लगते थे। वे पदयात्रा के माध्यम से जन-जागरण से संबंधित पर्चे (पत्रक) लोगों में बाँटते थे। एक बार पर्चे बाँटते समय खुदीराम अंग्रेजों की पकड़ में आ गए। परंतु क्षमतावान खुदीराम अंग्रेजों को पीटकर वहाँ से निकल भागे। बंगाल प्रांत में क्रांतिवीरों द्वारा चलाए जाने वाले अनेक गुप्त संगठन अंग्रेजों के मन में डर पैदा करते थे। किसी गुप्त संगठन के संचालक सत्येंद्रनाथ थे। खुदीराम अपने मित्र प्रफुल्ल के साथ जाकर सत्येंद्रनाथ से मिले। सत्येंद्रनाथ ने उपदेश दिया– "क्रांति का कार्य करने के लिए शरीर वज्र के समान मजबूत, बुद्धि तलवार की धार जैसी तेज और मन गंगाजल की तरह पवित्र होना चाहिए।" उस गुप्त प्रशिक्षण केंद्र से दोनों ने आठ महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। बंदूक चलाने में भी वे दोनों शीघ्र ही कुशल हो गए। महाराणा प्रताप के चरित्र से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की कि 'जब तक भारत अंग्रेजी शासन से मुक्त नहीं हो जाएगा, तब तक जूते (पादत्राण) नहीं पहनूँगा।'
📖 गद्यांश-3 कठिन-शब्दार्थाः:
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-पर्यायः / व्युत्पत्तिः | हिन्दी-अर्थः |
| हस्तगतः | बन्दीकृतः | पकड़ा गया / वश में आया |
| ताडनम् | प्रहारम् / ताड़नाम् | पिटाई / प्रहार |
| असिधारा | खड्गधारा | तलवार की धार |
| भुशुण्डी | अग्न्यायुधम् / बन्दूक | बंदूक |
| पादत्राणम् | उपानहम् / जूते | जूते / चप्पल |
कलकत्ता-जनपदस्य मुख्यः न्यायिकः आङ्ग्लः अधिकारी 'किङ्ग्ज़फोर्ड्' भारतीय-देशभक्तान् अतीवकठोररीत्या दण्डयति स्म। निर्दयः सः बालान् अपि न त्यजति स्म। तस्य स्थानान्तरणं यदा मुज़फ्फरनगरे जातं तदा 'सः हन्तव्यः' इति सशस्त्रक्रान्तिवीरमण्डलेन निश्चितम्। हत्यायोजनायाः सम्पूर्णम् उत्तरदायित्वं प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां स्वीकृतम्। तस्य वधस्य सूक्ष्मा योजनापि द्वाभ्यां निर्मिता। अष्टाधिक-नवदशशततमवर्षस्य एप्रिलमासस्य अष्टाविंशे दिनाङ्के (28-04-1908) किङ्ग्ज़फोर्ड् इत्यस्य रथविशेषे प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां विस्फोटकं प्रक्षिप्तम्। महान् विस्फोटध्वनिः जातः। अग्निज्वालाः आकाशम् अस्पृशन्। 'किङ्ग्ज़फोर्ड् हतः' अस्माकम् उत्तरदायित्वं पूर्णम् इति कृतार्थभावनया तौ पलायितवन्तौ। किन्तु हा धिक् ! यद्यपि सः किङ्ग्ज़फोर्डमह्योदयस्य रथः आसीत् तथापि तस्मिन् सः नासीदेव। केनेडीनामकस्य अधिकारिणः पत्नी पुत्री च तत्र आस्ताम्। ते मृते किन्तु किङ्ग्ज़फोर्ड् रक्षितः। आरात्रि द्वौ अपि क्रान्तिवीरौ अधावताम्। किन्तु दौर्भाग्यवशात् आङ्ग्लाः आरक्षकाः तौ अगृह्णन्। आङ्ग्लानां विरोधे कृतः प्रतीकारयत्नः व्यर्थः अभूत्। अनन्यगतिकः प्रफुल्लः भारतमातरं मनसा प्रणम्य 'वन्दे मातरम्' इति उद्घोष्य च स्ववक्षःस्थले भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारं कृतवान्। वीरबालः प्रफुल्लः हौतात्म्येन अमरः जातः।
🇮🇳 हिन्दी-अनुवादः:
कोलकाता जिले का मुख्य न्यायिक अंग्रेज अधिकारी 'किंग्सफोर्ड' भारतीय देशभक्तों को अत्यधिक कठोरता से दंडित करता था। निर्दयी वह बच्चों को भी नहीं छोड़ता था। जब उसका तबादला मुजफ्फरपुर में हो गया, तब 'वह मारने योग्य है' ऐसा सशस्त्र क्रांतिवीर संगठन ने निश्चित किया। हत्या की योजना का पूरा उत्तरदायित्व प्रफुल्ल और खुदीराम ने स्वीकार किया। उसके वध की सूक्ष्म योजना भी दोनों ने बनाई। 28 अप्रैल 1908 को किंग्सफोर्ड की विशेष गाड़ी (बग्गी) पर प्रफुल्ल और खुदीराम द्वारा बम (विस्फोटक) फेंका गया। भारी धमाका हुआ। आग की लपटें आकाश को छूने लगीं। 'किंग्सफोर्ड मारा गया, हमारी जिम्मेदारी पूरी हुई' इस कृतार्थ भावना से वे दोनों भाग निकले। परंतु अत्यंत खेद है! यद्यपि वह किंग्सफोर्ड महोदय की गाड़ी थी, फिर भी उसमें वह नहीं था। कैनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और पुत्री उसमें थीं। वे दोनों मर गईं परंतु किंग्सफोर्ड बच गया। रात भर दोनों क्रांतिवीर दौड़ते रहे। परंतु दुर्भाग्यवश अंग्रेज पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। अंग्रेजों के विरोध में किया गया बदला लेने का प्रयास व्यर्थ हो गया। कोई अन्य उपाय न देखकर प्रफुल्ल ने भारत माता को मन से प्रणाम करके 'वंदे मातरम्' का उद्घोष किया और अपने सीने पर बंदूक से गोली मार ली। वीर बालक प्रफुल्ल अपने बलिदान से अमर हो गया।
📖 गद्यांश-4 कठिन-शब्दार्थाः:
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-पर्यायः / व्युत्पत्तिः | हिन्दी-अर्थः |
| हन्तव्यः | मारणीयः | मारने योग्य |
| विस्फोटकम् | अग्न्यायुधविशेषः | बम / विस्फोटक सामग्री |
| प्रक्षिप्तम् | क्षिप्तम् / पातितम् | फेंका गया |
| प्रतीकारयत्नः | प्रतिशोधप्रयासः | बदला लेने का प्रयास |
| हौतात्म्येन | बलिदानेन | बलिदान से / शहादत से |
आङ्ग्लैः गृहीतः खुदीरामः न्यायालयं नीतः। तत्र अधिवक्तॄणां प्रत्येकं प्रश्नस्य खुदीरामस्य निश्चितम् उत्तरम् आसीत् यत् 'वन्दे मातरम्' इति। न्यायाधीशेन निर्दयतया बालाय खुदीरामाय मृत्युदण्डः उद्घोषितः उद्बन्धनम् इति। राष्ट्रभक्तस्य खुदीरामस्य मुखे भयं दुःखं वा नासीत् प्रत्युत प्रसन्नता, शान्तिः, तृप्तिः, तेजः च आसीत्। तत् दृष्ट्वा न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः चापि चकिताः। अष्टाधिक-नवदशशततमस्य वर्षस्य अगस्तमासस्य एकादशे दिनाङ्के (11-08-1908) बाल्ये वयसि एव देशस्य स्वातन्त्र्यार्थं खुदीरामः हुतात्मा जातः। प्रियभारतमातुः दर्शनार्थं सः हसन्, वन्दे मातरम् इति जपन् आनन्देन दिवं गतः।
🇮🇳 हिन्दी-अनुवादः:
अंग्रेजों द्वारा पकड़े गए खुदीराम को अदालत में लाया गया। वहाँ वकीलों के प्रत्येक प्रश्न पर खुदीराम का एक ही निश्चित उत्तर था— 'वंदे मातरम्'। न्यायाधीश ने निर्दयतापूर्वक बालक खुदीराम को फाँसी (उद्बंधन) द्वारा मृत्युदंड सुनाया। राष्ट्रभक्त खुदीराम के चेहरे पर डर या दुःख नहीं था, बल्कि प्रसन्नता, शांति, संतोष और तेज था। यह देखकर न्यायाधीश और अंग्रेज अधिकारी भी आश्चर्यचकित रह गए। 11 अगस्त 1908 को बाल्यावस्था में ही देश की स्वतंत्रता के लिए खुदीराम शहीद (हुतात्मा) हो गए। प्रिय भारत माता के दर्शन के लिए वे हँसते हुए, 'वंदे मातरम्' जपते हुए आनंदपूर्वक स्वर्ग सिद्धार गए।
📖 गद्यांश-5 कठिन-शब्दार्थाः:
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-पर्यायः / व्युत्पत्तिः | हिन्दी-अर्थः |
| अधिवक्तॄणाम् | वकीलानाम् / अभिभाषकाणाम् | वकीलों का |
| उद्बन्धनम् | गलपाशः / फाँसी | फाँसी देकर मृत्युदंड |
| हुतात्मा | बलिदानी / शहीदः | शहीद / बलिदानी |
| दिवम् | स्वर्गम् | स्वर्ग को |
| चकितः | विस्मितः | आश्चर्यचकित |
| कठिन-शब्दः | संस्कृत-अर्थः | हिन्दी-अर्थः | English Meaning |
| अधिवक्तॄणाम् | अभिभाषकाणाम् | वकीलों के | Of advocates |
| असाधारणः | न साधारणः | असामान्य | Extraordinary |
| आचरितवन्तः | पालितवन्तः | मनाये / पालन किया | Observed |
| आतङ्कम् | भयम् | डर / खौफ | Fear / Terror |
| आन्दोलनम् | विप्लवः | आंदोलन | Revolution |
| उद्बन्धनम् | दण्डविशेषः (फाँसी) | फाँसी की सजा | Execution by hanging |
| कदाचित् | एकदा | एक बार | Once |
| चकितः | विस्मितः | चौंकना / चकित | Amazed |
| दिवम् | स्वर्गम् | स्वर्ग को | To heaven |
| निर्दयः | निर्गता दया यस्मात् | दयारहित / क्रूर | Merciless |
| प्रतीकारयत्नः | प्रत्युत्तरप्रयासः | प्रतिशोध / बदला लेने का प्रयास | Attempt at retaliation |
| भुशुण्डी | शस्त्रविशेषः (बन्दूक) | बंदूक | Gun |
| व्यथितः | दुःखितः | चिन्तित / दुःखी | Worried / Pain-stricken |
| विस्फोटकम् | युद्धोपकरणविशेषः | विस्फोटक सामग्री | Explosive |
| संत्रस्तः | भीतः / पीडितः | आतंकित / डरा हुआ | Frightened |
📝 अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि (NCERT Solutions)
1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत:
(क) खुदीरामस्य जन्म कुत्र अभवत् ?
उत्तरम्: खुदीरामस्य जन्म बङ्गप्रान्ते मेदिनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे अभवत्।
(ख) खुदीरामः किमर्थं व्यथितः भवति स्म ?
उत्तरम्: खुदीरामः देशवासिषु जायमानैः आङ्ग्लानाम् अत्याचारैः व्यथितः भवति स्म।
(ग) सत्येन्द्रनाथः किम् उपदिष्टवान् ?
उत्तरम्: सत्येन्द्रनाथः उपदिष्टवान् यत् "क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्" इति।
(घ) खुदीरामः कदा पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति प्रतिज्ञातवान् ?
उत्तरम्: खुदीरामः प्रतिज्ञातवान् यत् "यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि" इति।
(ङ) किमर्थं न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः ?
उत्तरम्: मृत्युदण्डस्य उद्घोषणानन्तरम् अपि खुदीरामस्य मुखे भयं दुःखं वा नासीत् प्रत्युत प्रसन्नता, शान्तिः, तेजः च आसीत्, तत् दृष्ट्वा न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः।
2. अधः प्रदत्तेषु वाक्येषु किं वाक्यं सत्यं किं च असत्यम् इति लिखत:
(क) देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति। ➔ सत्यम्
(ख) निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म। ➔ सत्यम्
(ग) खुदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः। ➔ असत्यम्
(घ) खुदीरामः किङ्ग्ज़फोर्महोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्। ➔ सत्यम्
(ङ) खुदीरामः बालानां संघटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म। ➔ सत्यम्
3. अधः प्रदत्तानां संवत्सराणां शब्दानाम् अङ्कैः सह मेलनं कुरुत:
- (क) सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् ➔ 1947
- (ख) अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् ➔ 1908
- (ग) पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम् ➔ 1950
- (घ) पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् ➔ 1905
- (ङ) नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् ➔ 1889
5. सन्धिच्छेदं कुरुत:
(क) इत्यादयः ➔ इति + आदयः
(ख) सर्वेऽपि ➔ सर्वे + अपि
(ग) कश्चित् ➔ कः + चित्
(घ) प्रत्येकम् ➔ प्रति + एकम्
(ङ) वयस्तेजसः ➔ वयः + तेजसः
(च) अचिरादेव ➔ अचिरात् + एव
6. विग्रहवाक्यं दृष्ट्वा समस्तपदानि पूरयत:
(क) देशस्य भक्ताः ➔ देशभक्ताः
(ख) बालः च क्रान्तिवीरः च ➔ बालक्रान्तिवीरः
(ग) वज्रेण सदृशम् ➔ वज्रसदृशम्
(घ) असेः धारा ➔ असिधारा
(ङ) मृत्युः एव दण्डः ➔ मृत्युदण्डः
(च) न साधारणः ➔ असाधारणः
(छ) निर्गता दया यस्मात् सः ➔ निर्दयः
7. निर्देशानुसारं भूतकालिक-वाक्यपरिवर्तनं कुरुत:
(क) वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म। (लङ्-लकारः) ➔ वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः अभवन्।
(ख) सत्येन्द्रनाथः खुदीरामम् उपादिशत्। (क्तवतु-प्रत्ययः) ➔ सत्येन्द्रनाथः खुदीरामम् उपदिष्टवान्।
(ग) सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। (लङ्-लकारः) ➔ सः नवमीं कक्षां पूर्णां कर्तुं न आशक्नोत्।
(घ) क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कम् अजनयन्। (स्म) ➔ क्रान्तिवीराः आङ्ग्लानां मनसि आतङ्कं जनयन्ति स्म।
(ङ) प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारं कृतवान्। (लङ्-लकारः) ➔ प्रफुल्लः भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारम् अकरोत्।
8. 'चित्' प्रत्ययान्तपदानि प्रयुज्य वाक्यपूरणं कुरुत:
(क) कश्चित् बालकः गच्छति।
(ख) काचित् बालिका गच्छति।
(ग) किञ्चित् फलं खादतु।
(घ) कुत्रचित् लेखनी लुप्ता।
(ङ) कदाचित् सः आगच्छेत्।