श्रीः
जातकालङ्कार (गणेशकविविरचितम्)
सम्पूर्ण ७ अध्याय • श्लोक, अन्वय एवं प्रामाणिक भावार्थ
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अलङ्कार
हिन्दीव्याख्यासमन्वितं संस्करणम्
जातकालङ्कार (सम्पूर्ण ७ अध्याय डिजिटल संस्करण)
गणेश कवि द्वारा रचित जातकालङ्कार फलित ज्योतिष का अत्यन्त मधुर, गेय एवं प्रामाणिक शास्त्रीय ग्रन्थ है। इसमें स्रग्धरा एवं शार्दूलविक्रीडित छन्दों में कुण्डली के १२ भावों, विविध योगों, विषकन्या, आयु निर्णय तथा ग्रन्थकार वंशावली के ११०+ शास्त्रीय श्लोक अर्थ सहित संकलित हैं।
रचयिता: गणेश कवि
कुल अध्याय: ७ (संज्ञा, भाव, योग, विषकन्या, आयुर्दाय, वैपरीत्यभावफल, वंश)
कुल श्लोक: ११९
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