मातृ शब्दरूप (ऋकारान्त स्त्रीलिंग)-Matri Shabdroop




 

मातृ ऋकारान्त स्त्रीलिंग शब्द रूप (Matru Shabd Roop in Sanskrit)

संस्कृत व्याकरण में मातृ (माता) ऋकारान्त स्त्रीलिंग संज्ञा शब्दों का मुख्य और प्रतिनिधि रूप है। यदि आप मातृ शब्द के रूप याद कर लेते हैं, तो आप दुहितृ (पुत्री), स्वसृ (बहन), और ननान्दृ (ननद) जैसे सभी सम्बन्धात्मक ऋकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूप आसानी से समझ सकते हैं।

मातृ स्त्रीलिंग शब्द रूप तालिका (Matru Shabd Roop Table)

विभक्ति (Vibhakti) एकवचनम् (Ekavachanam) द्विवचनम् (Dvivachanam) बहुवचनम् (Bahuvachanam)
प्रथमा माता मातरौ मातरः
द्वितीया मातरम् मातरौ मातॄः
तृतीया मात्रा मातृभ्याम् मातृभिः
चतुर्थी मात्रे मातृभ्याम् मातृभ्यः
पञ्चमी मातुः मातृभ्याम् मातृभ्यः
षष्ठी मातुः मात्रोः मातॄणाम्
सप्तमी मातरि मात्रोः मातृषु
सम्बोधनम् हे मातः! हे मातरौ! हे मातरः!

महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points):

  • मातृ शब्द ऋकारान्त (जिसके मूल रूप के अंत में 'ऋ' की ध्वनि आती है) और स्त्रीलिंग शब्द है।
  • ध्यान दें कि द्वितीया बहुवचन में 'मातॄः' (दीर्घ 'ऋ' के साथ विसर्ग) का प्रयोग होता है, जबकि पुल्लिंग 'पितृ' शब्द में 'पितॄन्' बनता था।
  • इसी पैटर्न पर दुहितृ (बेटी/पुत्री) आदि के रूप बनते हैं।
अधिक संस्कृत अध्ययन सामग्री और NCERT सॉल्यूशंस के लिए जाएँ: sanskritgyan.in

Post a Comment

Previous Post Next Post