गुणिन् नकारान्त पुल्लिंग शब्द रूप (Gunin Shabd Roop in Sanskrit)
संस्कृत व्याकरण में गुणिन् (गुणी / गुणवान्) इनारान्त (नकारान्त) पुल्लिंग शब्द है। यदि आप गुणिन् शब्द के रूप याद कर लेते हैं, तो आप धनिन् (धनी), ज्ञानिन् (ज्ञानी), मन्त्रिन् (मंत्री), और योगिन् (योगी) जैसे सभी नकारान्त पुल्लिंग शब्दों के रूप आसानी से बना सकते हैं।
गुणिन् पुल्लिंग शब्द रूप तालिका (Gunin Shabd Roop Table)
| विभक्ति (Vibhakti) | एकवचनम् (Ekavachanam) | द्विवचनम् (Dvivachanam) | बहुवचनम् (Bahuvachanam) |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गुणी | गुणिनौ | गुणिनः |
| द्वितीया | गुणिनम् | गुणिनौ | गुणिनः |
| तृतीया | गुणिना | गुणिभ्याम् | गुणिभिः |
| चतुर्थी | गुणिने | गुणिभ्याम् | गुणिभ्यः |
| पञ्चमी | गुणिनः | गुणिभ्याम् | गुणिभ्यः |
| षष्ठी | गुणिनः | गुणिनोः | गुणिनाम् |
| सप्तमी | गुणिनि | गुणिनोः | गुणिषु |
| सम्बोधनम् | हे गुणिन्! | हे गुणिनौ! | हे गुणिनः! |
महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points):
- गुणिन् शब्द इनारान्त / नकारान्त (मूल रूप के अंत में हलन्त 'न्' वाला) और पुल्लिंग शब्द है।
- प्रथमा विभक्ति के एकवचन में 'गुणिन्' का रूप 'गुणी' बनता है।
- इसी पैटर्न पर धनिन् (धनी), ज्ञानिन् (ज्ञानी), योगिन् (योगी), मन्त्रिन् (मंत्री), और वागिन् (वाग्मी) आदि के रूप बनते हैं।
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