कक्षा 6 - दीपकम्_प्रथमः पाठः - वयं वर्णमालां पठामः (Class-6 Sanskrit Ch-1 Vayam Varnmalam Pathamah)

कक्षा 6 - दीपकम् (भाग 1) | प्रथमः पाठः - वयं वर्णमालां पठामः | sanskritgyan.in
कक्षा ६ | दीपकम् (भाग १)

प्रथमः पाठः - वयं वर्णमालां पठामः

(हम वर्णमाला पढ़ते हैं - सचित्र हिंदी व्याख्या एवं अभ्यास)

पाठस्य परिचयः (पाठ का परिचय)

वर्णाः द्विविधाः भवन्ति – स्वराः व्यञ्जनानि च।
सरल हिंदी व्याख्या: किसी भी भाषा को सीखने के लिए उसकी वर्णमाला (Alphabet) को जानना सबसे पहला कदम है। संस्कृत भाषा में वर्णों (अक्षरों) को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है: 1. स्वर (Vowels) और 2. व्यंजन (Consonants)। इस पाठ में हम इन वर्णों के भेद, उनकी मात्राएँ, शब्द संयोजन और उच्चारण-स्थानों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

१. स्वराः (स्वर - Vowels)

स्वराणाम् उच्चारणं स्वतन्त्ररूपेण भवति। स्वराः द्विविधाः सन्ति – समानाक्षराणि सन्ध्यक्षराणि च।
सरल हिंदी व्याख्या (बच्चों के लिए): प्यारे बच्चों, वर्णमाला में 'स्वर' वे अक्षर होते हैं जिन्हें बोलने के लिए हमें किसी दूसरे अक्षर की मदद नहीं लेनी पड़ती। ये पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। संस्कृत वर्णमाला में मूल रूप से दो प्रकार के स्वर बताए गए हैं:

(क) समानाक्षराणि (मूल स्वर)

वर्णमालायाम् आदौ ये सामान्याः स्वराः सन्ति, ते समानाक्षर-स्वराः भवन्ति।

हिंदी व्याख्या: वर्णमाला की शुरुआत में जो सामान्य (मूल) स्वर आते हैं, उन्हें समानाक्षर कहते हैं। ये दो तरह के होते हैं:
1. ह्रस्व (छोटे स्वर): इन्हें बोलने में बहुत कम समय (1 मात्रा) लगता है।
2. दीर्घ (बड़े स्वर): इन्हें बोलने में ह्रस्व से दोगुना समय (2 मात्रा) लगता है।
स्वर-प्रकारः स्वराः (वर्ण) उच्चारण-समयः (मात्रा) एवं टिप्पणी
ह्रस्व-स्वराः (५) अ, इ, उ, ऋ, लृ १ मात्रा का समय (छोटा उच्चारण)
दीर्घ-स्वराः (४) आ, ई, ऊ, ॠ २ मात्रा का समय (*'लृ'-वर्णस्य दीर्घाः न सन्ति)

(ख) सन्ध्यक्षराणि (संयुक्त स्वर)

द्वयोः निश्चित-स्वरयोः सन्धिद्वारा ये नवीनाः स्वर-वर्णाः जायन्ते, ते सन्ध्यक्षर-स्वराः भवन्ति। (*सन्ध्यक्षराणां ह्रस्वाः न सन्ति)

हिंदी व्याख्या: 'सन्धि' का मतलब होता है 'जोड़ना'। जब दो अलग-अलग मूल स्वरों को आपस में मिलाया जाता है, तो जो नया स्वर बनता है उसे सन्ध्यक्षर (संयुक्त स्वर) कहते हैं। ध्यान रखें, संयुक्त स्वर हमेशा बड़े (दीर्घ) ही होते हैं, इनका कोई छोटा (ह्रस्व) रूप नहीं होता।
संयुक्त स्वर स्वर-संयोजनम् (किससे मिलकर बने) उदाहरणे पदम् (संस्कृत उदाहरण)
ए अ + इ → ए एक + एकः = एकैकः
ऐ अ + ए → ऐ मम + ऐश्वर्यम् = ममैश्वर्यम्
ओ अ + उ → ओ सूर्य + उदयः = सूर्योदयः
औ अ + ओ → औ मम + ओषधिः = ममौषधिः

(ग) अनुनासिक-स्वराः

मुखेन सह नासिकया अपि उच्चारिताः स्वराः अनुनासिक-स्वराः भवन्ति –

हिंदी व्याख्या: जिन स्वरों को बोलते समय हवा मुँह के साथ-साथ हमारी नाक (नासिका) से भी निकलती है, उन्हें अनुनासिक स्वर कहते हैं। इसे दर्शाने के लिए अक्षर के ऊपर चंद्रबिंदु (ँ) लगाया जाता है।
अँ, आँ, इँ, ईँ, उँ, ऊँ, एँ, ऐँ, ओं, औँ

२. व्यञ्जनानि (व्यंजन - Consonants)

व्यञ्जनानाम् उच्चारणे कस्यचित् स्वरस्य सहायतायाः अपेक्षा अवश्यं भवति। अतः वर्णमालायां व्यञ्जनानाम् उच्चारणार्थं सर्वत्र 'अ' स्वरस्य योजनं भवति।
सरल हिंदी व्याख्या: व्यंजन वे अक्षर हैं जिन्हें हम स्वतंत्र रूप से बोल ही नहीं सकते! इन्हें बोलने के लिए हमें स्वरों की सहायता लेनी ही पड़ती है। शुद्ध व्यंजन के नीचे हलन्त (्) लगा होता है (जैसे- क्)। जब हम इसमें 'अ' स्वर मिला देते हैं, तब यह पूरा 'क' बनता है और तभी हम इसे बोल पाते हैं।

उदाहरण से समझें:
• क् + अ = क
• ख् + अ = ख
• ग् + अ = ग
• घ् + अ = घ

व्यंजनों के ४ मुख्य भेद होते हैं:

१. स्पर्शाः (वर्गीयाः) वर्णाः - २५ व्यञ्जनानि

हिंदी व्याख्या: 'स्पर्श' का अर्थ है 'छूना'। इन 25 व्यंजनों को बोलते समय हमारी जीभ मुँह के अलग-अलग हिस्सों (कंठ, तालु, दाँत, होंठ आदि) को पूरी तरह छूती है। ये 5-5 के समूहों (वर्गों) में बँटे हैं, इसलिए इन्हें 'वर्गीय व्यंजन' भी कहते हैं।
वर्गः (Group) वर्णाः (व्यंजन अक्षर) उच्चारण-स्थानम्
क-वर्गः क , ख , ग , घ , ङ कण्ठः (गला)
च-वर्गः च , छ , ज , झ , ञ तालु (मुँह की छत)
ट-वर्गः ट , ठ , ड , ढ , ण मूर्धा (मसूड़े के ऊपर)
त-वर्गः त , थ , द , ध , न दन्ताः (दाँत)
प-वर्गः प , फ , ब , भ , म ओष्ठौ (दोनों होंठ)

२. अन्तःस्थाः वर्णाः (अर्ध-स्वराः) - ४ वर्णाः

य , र , ल , व
हिंदी व्याख्या: ये ऐसे वर्ण हैं जो स्वर और व्यंजन के बीच में स्थित होते हैं। संस्कृत व्याकरण (यण संधि) में ये अक्सर स्वरों (इ, उ, ऋ, लृ) के स्थान पर प्रकट हो जाते हैं, इसलिए इन्हें 'अर्ध-स्वर' (आधे स्वर) भी कहा जाता है।

संधि उदाहरण:
• इ + अ → य् + अ (यथा- यदि + अपि = यद्यपि)
• ऋ + अ → र् + अ (यथा- पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा)
• लृ + अ → ल् + अ (यथा- लृ + आकृतिः = लाकृतिः)
• उ + अ → व् + अ (यथा- सु + आगतम् = स्वागतम्)

३. ऊष्म-वर्णाः - ४ वर्णाः

श , ष , स , ह
हिंदी व्याख्या: 'ऊष्म' का अर्थ होता है 'गर्म'। इन चार अक्षरों को बोलकर देखिए (श, ष, स, ह)। आप महसूस करेंगे कि इन्हें बोलते समय मुँह से रगड़ खाकर गर्म हवा (ऊष्मा) बाहर निकलती है। इसलिए ये ऊष्म वर्ण कहलाते हैं।

४. अयोगवाहौ वर्णौ - २ वर्णौ

अं (अनुस्वारः) , अः (विसर्गः)
हिंदी व्याख्या: अयोगवाह ऐसे विशिष्ट वर्ण हैं जो न तो पूरी तरह स्वर हैं और न ही व्यंजन। जहाँ आम व्यंजनों में स्वर बाद में जुड़ता है (क् + अ = क), वहीं अयोगवाह में स्वर पहले जुड़ता है (अ + ◌ं = अं, अ + ◌ः = अः)। बिना स्वर के सहारे ये कभी अकेले नहीं लिखे जा सकते।

३. गुणिताक्षराणि (व्यंजन व स्वर मात्रा संयोजन)

हिंदी व्याख्या: बच्चों, जब व्यंजनों के साथ अलग-अलग स्वरों की मात्राएँ जुड़ जाती हैं, तो उन्हें गुणिताक्षर कहते हैं। हिंदी में आप इसे 'बारहखड़ी' (क, का, कि, की...) के नाम से जानते हैं। संस्कृत में 'ऋ' और 'लृ' की मात्राएँ भी जुड़ती हैं। संस्कृत शुद्ध पढ़ने के लिए इनका सही उच्चारण बहुत ज़रूरी है।
व्यंजन + स्वर अ (◌) आ (ा) इ (ि) ई (ी) उ (ु) ऊ (ू) ऋ (ृ) ए (े) ऐ (ै) ओ (ो) औ (ौ)
क् क का कि की कु कू कृ के कै को कौ
च् च चा चि ची चु चू चृ चे चै चो चौ
ट् ट टा टि टी टु टू टृ टे टै टो टौ
त् त ता ति ती तु तू तृ ते तै तो तौ
प् प पा पि पी पु पू पृ पे पै पो पौ
य् य या यि यी यु यू यृ ये यै यो यौ
श् श शा शि शी शु शू शृ शे शै शो शौ

वयं शब्दार्थान् जानीमः (पाठ का सम्पूर्ण शब्दकोश)

क्र.सं. संस्कृत पदम् संस्कृत-संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थः English Meaning
1पित्राज्ञापितुः आदेशःपिता का आदेशFather's order
2लाकृतिः'ल'-वर्णस्य आकृतिः'ल' वर्ण का रूपShape of letter 'ल'
3एकैकःप्रत्येकम्हर एक / प्रत्येकEach one
4अजःछागःबकराGoat
5वधूःपरिणीता नारीविवाहिता स्त्री / बहूMarried woman
6मातृणम्मातुः ऋणम्माता का ऋणIndebtedness to Mother
7क्लृप्तम्कल्पितम्माना हुआ / कल्पितSupposed / Imagined
8लकारः'ल'-वर्णः'ल' वर्णLetter 'ल'
9ओम्प्रणवःएकाक्षर ब्रह्म (ॐ)Name of Brahma / Om
10औषधम्भेषजम्दवा / दवाईMedicine
11जिह्वारसनाजीभTongue
12नामधेयम्नामनामName
13भगिनीस्वसाबहनSister
14भ्राताअनुजः / अग्रजःभाईBrother
15पितामहीपितुः मातादादीPaternal Grandmother
16पितामहःपितुः पितादादाPaternal Grandfather
17मातामहीमातुः मातानानीMaternal Grandmother
18मातामहःमातुः पितानानाMaternal Grandfather
19सुश्रीःकुमारीकुमारी (Miss)Miss
20श्रीःलक्ष्मीः / सुन्दरतालक्ष्मी / सौंदर्यGoddess of prosperity
21उपाधिःविशिष्टताउपाधि / पदवी / श्रीमान् आदिTitle
22प्रथम-नाममुख्यं नामपहला नाम (First Name)First Name
23मध्य-नाममध्यवर्त्ति नामबीच का नाम (Middle Name)Middle Name
24अन्त्य-नामअन्तिम-नामअंतिम नाम (Last Name)Last Name
25कुल-नामकुलस्य / गोत्रस्य नामसरनेम / गोत्र का नामFamily Name / Surname

वयम् अभ्यासं कुर्मः (पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर)

प्रश्न १. चित्रं दृष्ट्वा नाम वदन्तु लिखन्तु च (चित्र देखकर नाम बताइए और लिखिए):
(क) गणेश जी का चित्र:
उत्तरम्गणेशः
प्रश्न २. चित्रं पश्यन्तु। पट्टिकातः समुचितान् वर्णसमूहान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु (चित्र देखकर दिए गए वर्णसमूहों से रिक्त स्थान भरिए):

[संकेत पट्टिका: क्का, ञ्चुः, क्षः, ङ्क, न्ताः, न्द्रः, ष्ट, त्रिण्डः]

(क) कमल (पद्म) → प________जम्
उत्तरम्पङ्कजम् (ङ्क)
(ख) चंद्रमा → च________ः
उत्तरम्चन्द्रः (न्द्र)
(ग) तोते की चोंच → शु________
उत्तरम्शुकचञ्चुः (ञ्चुः)
(घ) पेड़ → वृ________
उत्तरम्वृक्षः (क्ष)
(ङ) दाँत → द________
उत्तरम्दन्ताः (न्ताः)
(च) त्रिशूल → त्रि________शूलम्
उत्तरम्त्रिशूलम्
(छ) संख्या 8 → अ________
उत्तरम्अष्ट (ष्ट)
(ज) डमरू/ढोल → ढ________
उत्तरम्ढक्का (क्का)
(झ) शंख → श________ः
उत्तरम्शङ्खः (ङ्ख)
प्रश्न ३. प्रथम-वर्णेन पदं वदन्तु लिखन्तु च (दिए गए प्रथम वर्ण से दो-दो शब्द लिखिए):
प्रथम वर्णः प्रथम पदम् (पहला शब्द) द्वितीय पदम् (दूसरा शब्द)
अअग्निःअस्त्रम्
ककाकःकमलम्
चचक्रम्चन्द्रः
पपत्रम्पुष्पम्
ररथःरामः
इइक्षुःइन्द्रः
ननदीनौका
ममयूरःमुखम्
हहस्तःहंसः
ततरुःतालम्
ववृक्षःवनम्
शशुकःशङ्खः
प्रश्न ४. स्व-परिवारस्य सदस्यानां पूर्ण-नामानि लिखन्तु (अपने परिवार के सदस्यों के नाम तालिका में भरिए):
निर्देश: तालिका में उपाधि (श्रीमान्/श्रीमती/सुश्री), प्रथम नाम, मध्य नाम (यदि हो तो) और कुल-नाम (surname) लिखें।
सम्बन्धः उपाधिः प्रथम-नाम मध्यम-नाम / कुल-नाम
माताश्रीमती______________
पिताश्रीमान्______________
भगिनी (बहन)सुश्री / श्रीमती______________
भ्राता (भाई)श्रीमान् / कुमारः______________
पितामही (दादी)श्रीमती______________
पितामहः (दादा)श्रीमान्______________
मातामही (नानी)श्रीमती______________
मातामहः (नाना)श्रीमान्______________

योग्यताविस्तरः - वर्णानाम् उच्चारण-स्थानानि

सरल हिंदी व्याख्या: हम अपने मुँह से जो भी अक्षर बोलते हैं, वह मुँह के किसी खास हिस्से (गला, तालु, दाँत, होंठ) से टकराकर निकलता है। जिस अक्षर की आवाज़ मुँह के जिस हिस्से से पैदा होती है, वह हिस्सा उस अक्षर का 'उच्चारण-स्थान' कहलाता है। संस्कृत में मुँह और नाक मिलाकर कुल ६ मुख्य उच्चारण-स्थान माने गए हैं।
स्थानम् (स्थान) नाम (वर्ण वर्ग) वर्णाः (अक्षर)
१. कण्ठः (गला) कण्ठ्याः वर्णाः अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, विसर्ग (ः)
२. तालु (मुँह की छत) तालव्याः वर्णाः इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श
३. मूर्धा (ऊपरी मसूड़ा) मूर्धन्याः वर्णाः ऋ, ॠ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष
४. दन्ताः (दाँत) दन्त्याः वर्णाः लृ, त, थ, द, ध, न, ल, स
५. ओष्ठौ (होंठ) ओष्ठ्याः वर्णाः उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म
६. नासिका (नाक) नासिक्याः वर्णाः अनुस्वार (अं), ङ, ञ, ण, न, म

द्विस्थानीय-वर्णाः (दो स्थानों से बोले जाने वाले वर्ण)

हिंदी व्याख्या: कुछ वर्ण ऐसे हैं जो दो जगहों की मदद से एक साथ बोले जाते हैं:
• कण्ठ-तालव्य (ए, ऐ): गला + तालु (अ + इ = ए)
• कण्ठोष्ठ्य (ओ, औ): गला + होंठ (अ + उ = ओ)
• दन्त्योष्ठ्य (व): दाँत + होंठ

पक्षी-ध्वनिभ्यः स्वर-मात्रा ज्ञानम् (पक्षियों की आवाज़ से मात्रा ज्ञान)

चाषस्तु वदते मात्रां द्विमात्रं त्वेव वायसः ।
शिखी रौति त्रिमात्रं तु नकुलस्त्वर्धमात्रकम् ॥
श्लोक का हिंदी अर्थ: हमारे प्राचीन ऋषियों ने प्रकृति को बड़ी गहराई से देखा था! वे कहते हैं कि:
• नीलकंठ पक्षी (चाष): १ मात्रा की आवाज़ निकालता है (जैसे ह्रस्व स्वर- अ)।
• कौआ (वायस): २ मात्रा की आवाज़ निकालता है (जैसे दीर्घ स्वर- आ)।
• मोर (शिखी): ३ मात्रा की आवाज़ निकालता है (जैसे प्लुत स्वर- ओ३म्)।
• नेवला (नकुल): आधी (½) मात्रा की आवाज़ निकालता है (जैसे बिना स्वर वाला शुद्ध व्यंजन- क्)।

पाणिनीय-शिक्षा-सूत्राणि (उच्चारण-स्थान याद रखने के सूत्र):

व्याख्या: महान वैयाकरण महर्षि पाणिनि ने उच्चारण स्थानों को याद रखने के लिए कुछ जादुई सूत्र (Formulas) बनाए थे:
पाणिनीय सूत्रम् सूत्रार्थः (हिंदी अर्थ)
अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः 'अ/आ', 'क-वर्ग' (क ख ग घ ङ), 'ह' और विसर्ग का उच्चारण कण्ठ से होता है।
इचुयशानां तालु 'इ/ई', 'च-वर्ग' (च छ ज झ ञ), 'य' और 'श' का उच्चारण तालु से होता है।
ऋटुरषाणां मूर्धा 'ऋ/ॠ', 'ट-वर्ग' (ट ठ ड ढ ण), 'र' और 'ष' का उच्चारण मूर्धा से होता है।
लृतुलसानां दन्ताः 'लृ', 'त-वर्ग' (त थ द ध न), 'ल' और 'स' का उच्चारण दन्त से होता है।
उपूपध्मानीयानाम् ओष्ठौ 'उ/ऊ', 'प-वर्ग' (प फ ब भ म) का उच्चारण दोनों ओष्ठ (होंठों) से होता है।
ञमङणनानां नासिका च प्रत्येक वर्ग के 5वें वर्ण (ञ म ङ ण न) का उच्चारण अपने स्थान के साथ नासिका से भी होता है।
एदैतोः कण्ठतालु 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण कण्ठ और तालु दोनों से होता है।
ओदौतोः कण्ठोष्ठम् 'ओ' और 'औ' का उच्चारण कण्ठ और ओष्ठ से होता है।
वकारस्य दन्त्योष्ठम् 'व' वर्ण का उच्चारण दन्त और ओष्ठ से होता है।

© 2026 sanskritgyan.in - 'दीपकम् (भाग 1)' कक्षा ६ संस्कृत पाठ्यपुस्तक शिक्षण सामग्री।

Post a Comment

Previous Post Next Post