HomeShlok श्लोकः (Shlok) bySamskritGyaan -April 25, 2026 0 अतितॄष्णा न कर्तव्या, तॄष्णां नैव परित्यजेत्। शनै: शनैश्च भोक्तव्यं , स्वयं वित्तम् उपार्जितम् ॥अर्थात्- अधिक इच्छाएं नहीं करनी चाहिए पर इच्छाओं का त्याग भी नहीं करना चाहिए। अपने कमाये हुए धन का धीरे-धीरे उपभोग करना चाहिये उसी से सुख मिलता है। Tags Shlok श्लोकाः Facebook Twitter