श्लोकः (Shlok)

 


यस्यास्ति वित्तं स नर: कुलीन:।

स पण्डित: स: श्रुतवान् गुणज्ञ:।

स एव वक्ता स च दर्शनीय:।

सर्वे गुणा: कांचन-माश्रयन्ति।

अर्थात्- इस संसार में कुछ लोगों का मानना है कि जिस व्यक्ति पास धन है वही बड़े घराने का है,वही विद्वान है ,वही सुनने लायक है , वही गुणवान है , वही अच्छा वक्ता है वही दिखने में भी सुंदर है। असल में  ये सारे गुण धन में ही निवास करते हैं।


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