संस्कृत व्याकरण:
उच्चारण-स्थान
संस्कृत भाषा विश्व की
सबसे वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित भाषाओं में से एक है। इसकी वैज्ञानिकता का सबसे
बड़ा प्रमाण इसका वर्णमाला वर्गीकरण और उच्चारण-विज्ञान (Phonetics) है। महर्षि पाणिनि ने अपने 'अष्टाध्यायी' और 'पाणिनीय
शिक्षा'
में वर्णों के उच्चारण के सम्बन्ध में अत्यंत सूक्ष्म और
स्पष्ट नियम दिए हैं।
मुख के जिस भाग से जिस
वर्ण का उच्चारण किया जाता है, वह भाग उस वर्ण का उच्चारण-स्थान कहलाता है। उच्चारण करते समय हमारी जिह्वा (जीभ) मुख के
भीतर अलग-अलग स्थानों को स्पर्श करती है या प्राणवायु (हवा) उन स्थानों से टकराकर
बाहर निकलती है। मुख्य रूप से उच्चारण-स्थान 6 माने जाते हैं, किन्तु कुछ वर्णों के लिए दो स्थानों का मिला-जुला प्रयोग
होता है।
नीचे संस्कृत के
उच्चारण-स्थानों को सूत्रों और उदाहरणों के साथ विस्तार से समझाया गया है:
1. कण्ठ (Throat)
- सूत्र: अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः।
- व्याख्या: इस सूत्र के अनुसार
अ,
आ,
क-वर्ग
(क,
ख,
ग,
घ,
ङ),
ह
और
विसर्ग (ः)
का उच्चारण-स्थान कण्ठ है। इन
वर्णों को कण्ठ्य वर्ण
कहा जाता है।
2. तालु (Palate)
- सूत्र: इचुयशानां तालु।
- व्याख्या: इ, ई, च-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ), य और श का उच्चारण-स्थान तालु (मुख की ऊपरी छत का पिछला कोमल
भाग) है। इन्हें तालव्य वर्ण
कहते हैं।
3. मूर्धा (Hard Palate/Roof)
- सूत्र: ऋटुरषाणां मूर्धा।
- व्याख्या: ऋ, ॠ, ट-वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण), र और ष का उच्चारण-स्थान मूर्धा (ऊपरी दाँतों के ठीक पीछे का
मसूड़ा/कठोर भाग) है। इन्हें मूर्धन्य वर्ण
कहा जाता है।
4. दन्त (Teeth)
- सूत्र: लृतुलसानां दन्ताः।
- व्याख्या: लृ, त-वर्ग (त, थ, द, ध, न), ल और स का उच्चारण-स्थान दन्त (दाँत) है। इनका उच्चारण करते
समय जीभ दाँतों को छूती है। इन्हें दन्त्य वर्ण
कहते हैं।
5. ओष्ठ (Lips)
- सूत्र: उपूपध्मानीयानां ओष्ठौ।
- व्याख्या: उ, ऊ, प-वर्ग (प, फ, ब, भ, म) और उपध्मानीय वर्णों का उच्चारण-स्थान ओष्ठ (दोनों होंठ) है। इन्हें
ओष्ठ्य वर्ण
कहा जाता है।
6. नासिका (Nose)
- सूत्र: ञमङणनानां नासिका च।
- व्याख्या: प्रत्येक वर्ग के पंचम अक्षर अर्थात् अनुनासिक वर्णों—
ञ,
म,
ङ,
ण,
न
का उच्चारण अपने मूल वर्ग के
स्थान के साथ-साथ नासिका (नाक)
से भी होता है। अनुस्वार (ं) का
उच्चारण स्थान भी केवल नासिका है (नासिकांनुस्वारस्य)।
संयुक्त (द्वि-स्थान)
उच्चारण-स्थान
कुछ स्वर और व्यंजन ऐसे
हैं जो दो स्थानों की सहायता से बोले जाते हैं:
- कण्ठतालु: एदैतोः कण्ठतालु। — ए और ऐ का उच्चारण-स्थान कण्ठ और तालु दोनों हैं।
- कण्ठोष्ठ: ओदौतोः कण्ठोष्ठम्। — ओ और औ का उच्चारण-स्थान कण्ठ और ओष्ठ दोनों हैं।
- दन्तोष्ठ: वकारस्य दन्तोष्ठम्।
— व
व्यंजन का उच्चारण-स्थान दन्त
और ओष्ठ दोनों हैं।
- जिह्वामूल: जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम्।
— क और ख के पहले आने
वाले अर्धविसर्ग सादृश्य वर्णों का स्थान जिह्वा का मूल (जड़) होता है।
बहुविकल्पात्मक प्रश्नोत्तरी (MCQ Quiz)
यहाँ उच्चारण-स्थान से
सम्बन्धित 15 महत्त्वपूर्ण
बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
1. 'इचुयशानां _____' रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द क्या है?
(क)
कण्ठः
(ख)
तालु
(ग)
मूर्धा
(घ)
दन्ताः
2. 'क' वर्ग का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
तालु
(ख)
मूर्धा
(ग)
कण्ठ
(घ)
ओष्ठ
3. 'ऋ' वर्ण का उच्चारण-स्थान निम्न में से कौन-सा है?
(क)
कण्ठ
(ख)
दन्त
(ग)
तालु
(घ)
मूर्धा
4. 'व'कार (व्यंजन 'व') का उच्चारण-स्थान क्या माना गया है?
(क)
कण्ठोष्ठम्
(ख)
दन्तोष्ठम्
(ग)
कण्ठतालु
(घ)
केवल नासिका
5. 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
कण्ठतालु
(ख)
कण्ठोष्ठम्
(ग)
दन्तोष्ठम्
(घ)
मूर्धा
6. 'लृतुलसानां _____' इस सूत्र के अनुसार 'स' का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
तालु
(ख)
मूर्धा
(ग)
दन्त
(घ)
कण्ठ
7. अनुस्वार (ं) का उच्चारण-स्थान क्या होता है?
(क)
कण्ठ
(ख)
नासिका
(ग)
ओष्ठ
(घ)
तालु
8. 'श' (शलगम वाला श) वर्ण का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
मूर्धा
(ख)
दन्त
(ग)
तालु
(घ)
कण्ठ
9. 'ओ' और 'औ' वर्णों का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
कण्ठतालु
(ख)
दन्तोष्ठम्
(ग)
कण्ठोष्ठम्
(घ)
नासिका
10. 'म' वर्ण का मुख्य वर्ग स्थान ओष्ठ है, इसके अतिरिक्त और कौन-सा स्थान इसके उच्चारण में सहायक है?
(क)
तालु
(ख)
कण्ठ
(ग)
मूर्धा
(घ)
नासिका
11. पाणिनीय शिक्षा के अनुसार मुख्य रूप से मूल उच्चारण स्थान
कितने माने गए हैं?
(क) 5
(ख) 6
(ग) 4
(घ) 3
12. 'ष' (षट्कोण वाला ष) कौन-सा वर्ण कहलाता है?
(क)
तालव्य
(ख)
दन्त्य
(ग)
मूर्धन्य
(घ)
कण्ठ्य
13. 'उ' और 'ऊ' का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
ओष्ठ
(ख)
तालु
(ग)
कण्ठ
(घ)
दन्त
14. 'ह' वर्ण का उच्चारण-स्थान क्या है?
(क)
तालु
(ख)
कण्ठ
(ग)
मूर्धा
(घ)
दन्तोष्ठम्
15. 'ट, ठ, ड, ढ, ण' का उच्चारण मुख के किस भाग से होता है?
(क)
दन्त
(ख)
ओष्ठ
(ग)
तालु
(घ)
मूर्धा
उत्तरमाला (Answer
Key)
1.
(ख) तालु (सूत्र: इचुयशानां तालु)
2.
(ग) कण्ठ (सूत्र: अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः)
3.
(घ) मूर्धा (सूत्र: ऋटुरषाणां मूर्धा)
4.
(ख) दन्तोष्ठम् (सूत्र: वकारस्य दन्तोष्ठम्)
5.
(क) कण्ठतालु (सूत्र: एदैतोः कण्ठतालु)
6.
(ग) दन्त (सूत्र: लृतुलसानां दन्ताः)
7.
(ख) नासिका (सूत्र: नासिकांनुस्वारस्य)
8.
(ग) तालु (सूत्र: इचुयशानां तालु)
9.
(ग) कण्ठोष्ठम् (सूत्र: ओदौतोः कण्ठोष्ठम्)
10.(घ) नासिका (सूत्र: ञमङणनानां नासिका च)
11.
(ख) 6 (मुख्य रूप से छह स्थान: कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ, नासिका)
12.
(ग) मूर्धन्य (सूत्र: ऋटुरषाणां मूर्धा)
13.
(क) ओष्ठ (सूत्र: उपूपध्मानीयानां ओष्ठौ)
14.
(ख) कण्ठ (सूत्र: अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः)
15.
(घ) मूर्धा (सूत्र: ऋटुरषाणां मूर्धा)
