वृथा वदति लोको यम् , ताम्बूलं मुखभूषणम्।
मुखस्य भूषणं पुंसां , स्यात् एकैव सरस्वती।।
अर्थात्- लोग झूठ कहते हैं कि पान खाने से मुख की सुंदरता बढ़ती है। मुख की सुंदरता तो केवल मीठा बोलने से ही बढ़ती है।
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मुखस्य भूषणं पुंसां , स्यात् एकैव सरस्वती।।
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